सम्पादकीय

हिमाचल की बागवानी विकास यात्रा के तीन मजबूत स्तंभ एक साथ सेवा निवृत्त

1988 से 2025 तक की सेवा यात्रा सम्पन्न — तीन बागवानी अधिकारियों ने एक साथ ली सेवा निवृत्ति

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हिमाचल की बागवानी विकास यात्रा के तीन मजबूत स्तंभ एक साथ सेवा निवृत्त

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हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के लिए यह क्षण गर्व और भावुकता से परिपूर्ण है, जब विभाग के तीन वरिष्ठ और समर्पित अधिकारी — डॉ. विजेंदर कुमार, डॉ. सुरिंदर सिंह राणा एवं डॉ. रामनाथ ठाकुर — एक साथ सेवा निवृत्त हो रहे हैं। इन तीनों अधिकारियों ने अपने सेवाकाल की शुरुआत वर्ष 1988–89 में उद्यान प्रसार अधिकारी के पद से की थी और तत्पश्चात अपने 37 वर्षों के उल्लेखनीय सेवाकाल में राज्य के विभिन्न जिलों और विभागीय क्षेत्रों में कार्य करते हुए हिमाचल प्रदेश में बागवानी विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

 

डॉ. विजेंदर कुमार ने पौध संरक्षण के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया और वरिष्ठ पौध संरक्षण अधिकारी, शिमला के रूप में उन्होंने फील्ड से लेकर नीति स्तर तक किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए विभागीय योजनाओं को मजबूती दी। डॉ. सुरिंदर सिंह राणा ने जिला कांगड़ा में बतौर उपनिदेशक उद्यान अपने प्रशासनिक कौशल और तकनीकी ज्ञान से बागवानी गतिविधियों को नई दिशा दी। वहीं डॉ. रामनाथ ठाकुर ने कुल्लू जिला जैसे विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में कार्य करते हुए जलवायु अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देकर स्थानीय बागवानों को प्रेरित किया।

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इन तीनों अधिकारियों की सेवा, समर्पण, कार्यनिष्ठा, तकनीकी दक्षता एवं नेतृत्व क्षमता ने विभागीय सहयोगियों, अधिकारियों और किसानों के बीच एक अमिट छाप छोड़ी है। इनकी कार्यशैली, अनुशासन और जनसेवा की भावना विभाग की भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी रहेगी।

 

इनके सेवानिवृत्ति के अवसर पर डॉ. रंजन शर्मा (अध्यक्ष), डॉ. शमशेर सिंह डेरु (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), डॉ. समीर सिंह राणा (उपाध्यक्ष), डॉ. कुशाल सिंह मेहता (महासचिव), डॉ. अजय रघुवंशी (वित्त सचिव), डॉ. जीना बनयाल (सचिव), डॉ. राजेश भागटा (सचिव), डॉ. शैलजा राणा (सचिव) एवं डॉ. राहुल चौधरी (प्रेस सचिव) की ओर से इन सभी अधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की जाती हैं।

हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि ये सभी अधिकारी अपने नए जीवन चरण में उत्तम स्वास्थ्य, सुख, सम्मान एवं पारिवारिक समृद्धि के साथ आनंदमय समय व्यतीत करें। आपका सेवा-काल बागवानी विभाग के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

Deepika Sharma

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