स्वास्थ्य

असर विशेष: ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV): एक खामोश खतरा, जिससे लाखों महिलाएं अनजान

क्या है ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)?

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भारत में महिलाओं के लिए कैंसर का सबसे बड़ा कारण बन चुका है एक वायरस – ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)। यह वायरस बेहद आम है, लेकिन इसकी जानकारी और जागरूकता का स्तर चिंताजनक रूप से कम है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल लगभग एक लाख से अधिक महिलाएं सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) से पीड़ित होती हैं, जिसका मुख्य कारण HPV है।

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वही हिमाचल प्रदेश में  सर्वाइकल कैंसर की तस्वीर  देखी जाय तो हर वर्ष दो सौ नए कैंसर रोगी पहचाने जा रहे हैं जो महिलाओं में कैंसर के कुल आंकड़ों में दूसरे स्थान पर है

HPV एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से त्वचा से त्वचा के संपर्क, खासतौर पर यौन संपर्क से फैलता है। इसके 100 से ज्यादा प्रकार होते हैं, जिनमें से लगभग 40 प्रकार जननांग क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं। इनमें से कुछ प्रकार जननांग मस्से (Genital Warts) का कारण बनते हैं, जबकि कुछ कैंसर के लिए जिम्मेदार होते हैं।

क्यों है यह खतरनाक?

HPV से संक्रमित अधिकांश लोगों को किसी तरह के लक्षण नहीं होते, लेकिन वायरस शरीर में चुपचाप सक्रिय रहता है। समय के साथ यह सर्वाइकल कैंसर, गले का कैंसर, मुंह का कैंसर, और गुदा का कैंसर भी पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का लगभग 95% कारण HPV संक्रमण हो

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क्या है बचाव का रास्ता?

HPV से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है – HPV वैक्सीन
भारत में अब स्वदेशी वैक्सीन ‘Cervavac’ भी उपलब्ध है, जिसे 9 से 14 साल की उम्र में देना सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है। इसके अलावा यौन स्वच्छता, कंडोम का इस्तेमाल और नियमित पैप स्मीयर टेस्ट से भी बीमारी को रोका जा सकता है।

भारत में स्थिति

भारत दुनिया में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों में दूसरे स्थान पर है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति और गंभीर है, जहां न जांच की सुविधा है, न वैक्सीनेशन की जानकारी।

सरकार और समाज की भूमिका

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल ही में HPV वैक्सीन को राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) में शामिल करने की घोषणा की है। यह एक बड़ा कदम है, लेकिन इसके साथ ज़रूरी है कि स्कूलों, गांवों और शहरों में इसके बारे में खुलकर बातचीत हो।

HPV एक ऐसा वायरस है जो दिखता नहीं, लेकिन जान ले सकता है। समय पर जागरूकता, जांच और टीकाकरण से इस खामोश खतरे से बचा जा सकता है।
अब वक्त है कि हम अपनी बेटियों, बहनों और पत्नियों को इस वायरस से सुरक्षा देने के लिए खुलकर बात करें और एक्शन लें।

Deepika Sharma

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