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मंदिर राजाश्रय का विषय है *न कि राजकोष का * प्रेम पण्डित* *प्रदेश संयोजक*

*प्रदेश संयोजक* *( देव समाज प्रकोष्ठ)* *भारतीय जनता पार्टी* *हिमाचल प्रदेश

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अनादि काल से मंदिर राजाश्रय से फलते फूलते रहे है। सनातन के इन तीर्थ स्थलों पर मुस्लिम आक्रांताओं से लेकर अंग्रेजी शासको का लुट खसूट विंध्वश का दौर इतिहास के पन्नो में उनके जुल्म की तारीख लिख चुका है लेकिन जब भारतीय जनता पार्टी आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में और हिमाचल डॉक्टर बिंदल जी के प्रदेश नेतृत्व से सनातन के अभूतपूर्व पुनरुथान की और अग्रसर है तो प्रदेश में अधिग्रहित मंदिरों के चढ़ावे का प्रदेश सरकार द्वारा कानून के विपरीत सरकारी योजनाओं तथा विषयों पर व्यय कांग्रेस सरकार की धर्म विरुद्ध सोच की परिचायक है।
हिमाचल प्रदेश में हिंदू धार्मिक सार्वजनिक संस्थान एवं पूरत विन्यास अधिनियम अधिग्रहित मंदिरों के संचालन के लिए लागू है और इसके अंतर्गत सरकार के पास सीधे सीधे कोई ऐसा अधिकार प्राप्त नहीं है कि वो इन धर्म स्थलों के चढ़ावे की राशि का प्रयोग संबंधित मंदिर न्यास के मद्दों के अतिरिक्त किसी और कार्य या विषयों के लिए करे।
सरकार का कार्य मंदिरों के विकास के साथ साथ तीर्थ यात्रियों के लिए भूमि, धन वा मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवाना है न कि मंदिरों को राजकोष भरने का माध्यम बनाना है। ऐसा कोई भी कृत्य मंदिर अधिनियम के साथ साथ शास्त्रों के विरुद्ध जायेगा और पाप की शिखरतम श्रेणी में आंका जाएगा। देव समाज प्रकोष्ठ, भारतीय जनता पार्टी हिमाचल की धार्मिक विरासत जो मंदिर अधिनियम में परिभाषित है के विपरीत किए जाने वाले सभी कार्यों की आलोचना करती है और आह्वान करती है कि सरकार अन्य मतों दर्शनों धर्मावलंबियों के चढ़ावे के साथ छेड़छाड़ कर के दिखाए ताकि उन्हें समुझ आ सके कि दूध का दूध और पानी का पानी कैसे होता है।
देव समाज प्रकोष्ठ , भारतीय जनता पार्टी हिमाचल प्रदेश देव संस्कृति और देव स्थलों की सुरक्षा, प्रबंधन, संचालन को नियमाविरुद होने से रोकने में कानून का दरवाजा भी खड़खड़ाएगी और जन चेतना अभियान भी छेड़ेगी।

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Deepika Sharma

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