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EXCLUSIVE: हम नहीं पकड़ेंगे आतंकी बंदरों को..”ख़तरे में शिमला”

बंदर पकड़ने वाली स्पेशल टीमें माँग रही ज़्यादा पैसा शिमला में बंदर पकड़ना हुआ मुश्किल

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शिमला में दिन प्रतिदिन बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है उधर बंदरों को पकड़ने के लिए  बुलाए जा रहे  “विशेष लोग “अब बंदर पकड़ने के लिए मुकरने लगे है। जिसमें उनका ये कहना है की प्रति बंदर को पकड़ने के लिए जो राशि दी जा रही है वो काफ़ी नहीं है। ये लोग माँग कर रहे है कि उन्हें बंदर पकड़ने के लिए जो राशि दी जा रही है उसे बढ़ाया जाय ।

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प्रति बंदर को पकड़ने के लिए अभी सात सौ रुपय मिलते है  वह एक हज़ार रुपय  माँग रहे है।अब परेशानी ये खड़ी हो गई है कि शिमला में बंदरों के सताए लोगों की शिकायतें तो बहुत आ रही है लेकिन उन्हें पकड़ने वालों की संख्या कम होने से शिमला में आतंकी बंदरों का आतंक बढ़ता चला जा रहा है। और उन्हें नहीं पकड़ा जा रहा है।

अब इस पर सरकार कितनी जल्दी गंभीरता दिखाती है शिमला वासियों की नजरें टिकी है
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स्टाफ़ है कम
प्रति दिन शिमला से ही चार से पाँच शिकायतें आ रही है ।जिसमें इस पर कार्रवाई के लिए मात्र छ लोग है जिसमें दो गार्ड है । अब ये स्टाफ़ बंदर  ही नहीं पकड़ते  अन्य जानवरो की आने वाली शिकायतों पर भी अपनी कार्रवाई करते हैं।लेकिन स्टाफ़ कम होने से शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हो पा रही है।और बंदरों का खौफ़ बढ़ता जा रहा है
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बंदर पकड़ने के लिए बाहर से बुलाय जाते है लोग
बंदर पकड़ने के लिए पूर्ण स्टाफ़ नहीं होने की वजह से बंदरों को पकड़ने के लिए बाहर से अन्य लोगों को बुलाया जाता है। ये लोग अक्सर शिमला के ऊपरी इलाकों से आते हैं 

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लेकिन वह भी पैसे ज़्यादा माँग रहे हैं। हालाँकि जब नसबंदी कर चुके बंदरों को पकड़ा जाता है तो उसकी राशि भी संबंधित प्रशासन द्वारा उन्हें कम दी जाती है। जिस पर उनका यह कहना है कि यह राशि अब बढ़ायी जाए

ये उठे है सवाल
बंदरों को पकड़ने के लिए क्या सरकार गंभीर नहीं है?
आतंकी बंदरों को मारने के आदेश क्यों जारी नहीं किए जाते?
बंदर पकड़ने वाले लोगो को दी जाने वाली राशि क्यों नहीं बढ़ाई जाती ?
यदि स्टाफ़ कम है तो उसकी संख्या में इज़ाफ़ा क्यों नहीं किया जाता है?
सिर्फ़ मुआवज़ा देने तक ही प्रशासन सीमित होकर रह गया है?

जनता की गलती
यदि बंदरों को आराम से खाने को मिलता है तो वह शहरों की तरफ़ आएंगे।और लोगों को काटेंगे। लोग रास्ते में खाने का सामान डालते हैं। यह समस्या शिमला में काफ़ी देखी जा रही है

बंदरों के डर से कईयों की जा चुकी है जान

शिमला में बंदरों के ख़ौफ़ से रह स्कूली बच्चों और आम लोगों का चलना मुश्किल हो गया है वहीं बंदरों के आतंक से कई लोगों की जान तक भी जा चुकी है। पिछले वर्ष ही टूटू से एक लड़की छत से गिरकर मर गई

वीरवार को कैंपस लॉज में एक बच्ची के सिर में लगी चोट

वीरवार को शिमला में ओल्ड बस स्टैंड के पास हुई घटना में ताराहॉल स्कूल जा रही एक बच्ची ,बंदर के खोफ के कारण गिर गई।जिसके कारण उसके सिर पर चोट लगी

Deepika Sharma

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