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भारतीय नव वर्ष के उपलक्ष्य पर एचपीयू में खीर के भंडारे का आयोजन

एचपीयू की एबीवीपी इकाई ने भारतीय नव वर्ष के उपलक्ष्य पर पिंक पैटल पर बाँटी खीर

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा विवि के ऐतिहासिक पिंक पैटल पर भारतीय नव वर्ष के उपलक्ष्य पर खीर के भंडारे का आयोजन किया गया |

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इकाई मंत्री इन्दर नेगी ने विवि के समस्त छात्र समुदाय, शिक्षक एवं गैर शिक्षक वर्ग क़ो हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत 2080 की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए कहा कि भारतीय नववर्ष हमारे सांस्कृतिक विरासत है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना थी। भगवान विष्णु का प्रथम अवतार भी इसी दिन हुआ था। नववर्ष में प्रकृति मे नयापन होता है। पेड़ पौधों पर फुल-मंजर, कली इसी समय आने आरम्भ होते है। हिंदू नववर्ष सबके लिए गर्व का क्षण है। हम सभी देशवासियों को अपनी जीवन संस्कृति के रक्षा करने लिए तत्पर रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य कोलाहल में हम अपने देश की संस्कृति को ना भूलें। पश्चिमी सभ्यता कभी भी हमारी बराबरी नहीं कर सकती। फूहड़ता कभी भी भारतीय समाज का अंग नहीं बन सकता। हमारी संस्कृति जीवंत है। नव वर्ष में हम सभी संकल्प लें कि पाश्चात्य जीवन शैली को अपने जीवन में हावी नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि हम सभी को भारतीयता के रंग में रंगना होगा और अपने विरासत के प्रति सजग सतर्क रहना होगा। हिंदू नव वर्ष दुनिया भर के हिंदुओं के लिए एक महत्वपूर्ण समय है। यह नए सिरे से शुरू करने, नए संकल्प करने और बीत चुके वर्ष को प्रतिबिंबित करने का समय है। कई हिंदुओं के लिए नया साल उनकी संस्कृति और परंपराओं का जश्न मनाने का समय है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनमानस में हिंदू नव वर्ष का प्रचार प्रसार करें। नववर्ष के दिन आने वाली युवा पीढ़ी को जागरूक व प्रेरित करें। हम सभी को बताना होगा कि हिंदू दर्शन, हिंदू चिंतन दुनिया में अनूठा है। हिंदू चिंतन पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं। कहा कि हमारे लिए कोई दुश्मन नही है। दुनिया को शांति के मार्ग पर चलने में हिंदू धर्म ही सहायक हो सकता है।

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पिंक पैटल पर खीर के भंडारे के आयोजन क़ो सफल बनाने पर सभी का आभार जताते हुए इंद्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति-सभ्यता को दुनिया में सबसे प्राचीन माना गया है। भारतीय समाज की सहिष्णुता, विविधता, एकता एवं सामंजस्य दुनिया के लिए एक अद्भुत आदर्श है। आदि काल से हजारों-लाखों युद्धों को झेलने के बाद भी संघर्षशील भारतीय समाज ने अपनी संस्कृति, सभ्यता की धरोहर व विरासत को संजोए रखा है |

 

Deepika Sharma

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