विनोद प्रकाश गुप्ता “शलभ” के गजल संग्रह ‘बूंद बूंद गजल‘ का लोकार्पण और कवि गोष्ठी
आज शिमला के गेयटी सभागार में साहित्यिक संस्था नवल प्रयास शिमला के निदेशक मंडल के सौजन्य से प्रख्यात गज़लकार, पूर्व प्रधान सचिव, हिमाचल सरकार डा.विनोद प्रकाश गुप्ता “शलभ” के दूसरे गज़ल संग्रह का लोकार्पण हुआ। इस आयोजन के मुख्य अतिथि पूर्व उपाध्यक्ष, हिमाचल अकादमी थे और अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्रीनिवास जोशी ने की।
डॉ0 विनोद प्रकाश गुप्ता “शलभ” के इस दूसरे गज़ल संग्रह में 101 गजलें शामिल हैं जिसे राजकमल प्रकाश समूह के राधाकृष्ण प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। इस संग्रह की विशेष बात यह है कि शलभ जी ने विकराल करोना काल में 320 गज़लें लिखीं जिन में से ही इन्हें चयनित किया गया है। उनकी सक्रियता इसलिए भी अचंभित करती है कि स्वयं करोना जैसी महामारी की चपेट में कई दिनों तक अस्वस्थ रहने के बावजूद उन्होंने जिस आत्मबल और अपनी रचनात्मकता से इस महामारी को शिकस्त दी है वह दुलर्भ है। हालांकि विनोद प्रकाश गुप्ता “शलभ” प्रशासनिक सेवाओं में रहते भी कविताएं लिखते रहे हैं परन्तु सेवानिवृति के बाद उन्होंने जिस जुनून और साधना से गज़ल विधा को साधा है ऐसे उदाहरण विरल मिलते हैं। उनकी गज़लें देश की शीर्ष साहित्यिक पत्रिकाओं में तो प्रकाशित हो ही रही है साथ ही शायद ही कोलकाता, मुम्बई और दिल्ली में कोई मुशायरा हो जिसमें उनकी गरिमामयी भागीदारी न रहती हो।
गज़ल संग्रह में गुप्ता जी की ‘अपनी बात‘ के अतिरिक्त ख्यात गज़लकार विजय कुमार स्वर्णकार और द्विजेन्द्र द्विज की भूमिकाएं भी हैं। उनका मानना है कि ये गज़लें हमारे वर्तमान के अभिशप्त और सन्तप्त जीवन की संश्लिष्ट सच्चाईयों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ मनुष्य की अदम्य जिजीविषा व जीवन के उल्लास के उत्सर्ग का गौरवगान हैं। गुप्ता जी के तीन गज़ल संग्रह और तैयार हो चुके हैं जो आगामी वर्षों में हमारे सामने होंगे।
इस आयोजन के मुख्य अतिथि सुदर्शन वशिष्ठ और अध्यक्ष श्रीनिवास जोशी ने भी गुप्ता जी को विमोचित पुस्तक और उनकी गजलों पर बहुत विस्तार से अपनी बात रखी। अन्य वक्ताओं में आत्मा रंजन और सुमित राज ने पुस्तक पर सारगर्भित वक्तव्य दिए।
विनोद प्रकाश गुप्ता जी की अर्धांगिनी शशि गुप्ता जी ने गुप्ता जी के जीवन संघर्ष पर विस्तार से बात की और उनकी कुछ गजलें भी पढ़ीं।
लोकार्पण और पुस्तक चर्चा के बाद गज़ल और कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें कई स्थानीय वरिष्ठ और युवा लेखकों ने रचनाएं पढ़ीं। रचनापाठ में शामिल रहे डॉ. हेमराज कौशिक, डॉ.विजय लक्ष्मी, जगत प्रसाद शास्त्री, इंदरजीत सिंह दुग्गल, श्याम सिंह, विनोद रोहतकी, डॉ.कर्म सिंह, कुल राजीव पंत, श्रीमती पंत, कश्मीर चंद जी, कुलदीप गर्ग तरुण, अनिता शर्मा, ओम प्रकाश शर्मा, भारती कुठियाला, अनुराधा कश्यप, नीता अग्रवाल, नरेश दियोग, उमा ठाकुर, स्नेह नेगी, गुलपाल, लेखराज चौहान, अजय विचलित, सीताराम शर्मा, डीएवी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टूटू के छात्र आरब, श्रेयसी, भृगु, इशान,मिताली और उनके अध्यापक नीरज ।
मंच का खूबसूरत संचालन जानेमाने कवि-आलोचक जगदीश बाली ने किया और कार्यक्रम का लाइव प्रसारण हिमालयन डिजिटल मीडिया के संचालक हितेन्द्र शर्मा ने किया।




