असर इंपैक्ट: मासिक धर्म जागरूकता पर हिमाचल में चलेगा विशेष अभियान
असर न्यूज ने उठाया है मामला

मासिक धर्म लड़कियों के लिए हमेशा एक अनोखी घटना रही है। हालाँकि, यह हमेशा उन मिथकों से घिरा रहा है जो महिलाओं को सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के कई पहलुओं से बाहर करते हैं। भारत में यह विषय आज तक वर्जित रहा है। कई समाजों में मौजूद मासिक धर्म के बारे में इस तरह की लड़कियों और महिलाओं की भावनात्मक स्थिति, मानसिकता और जीवन शैली और सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं।
इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य और महिला एवम बाल स्वास्थ्य विभाग हिमाचल में विशेष स्तर पर मासिक धर्म को लेकर जागरूक कार्यक्रम चलाने वाला है। जिसमें स्कूलों में भी
मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ाई जाएगी। सभी लड़कियों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि वे सभी अपने परिवार एवं गावों के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक कर सके। और उनकी सोच को मासिक धर्म के प्रति बदल सके।
यदि वह प्रताड़ना को लेकर अपनी शिकायत दर्ज करवाना चाहती है तो वह करवा सकती है।
भारत के कई हिस्सों में सांस्कृतिक रूप से मासिक धर्म को अभी भी गंदा और अशुद्ध माना जाता है। हिमाचल प्रदेश में आज भी देखने को मिलते हैं हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की रहने वाली प्रोमिला ने असर टीम के साथ अपनी मासिक धर्म से सम्बन्धित आपबीती सुनाई।

जिस पर डॉक्टर राहुल प्रशासनिक अधिकारी आईजीएमसी ने अपने स्तर पर लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है। जिसमें उन्होंने असर न्यूज को दिए बयान में लोगों को इस ओर विशेष तौर पर जागरूक होने की अपील की है।
उधर मंडी की रहने वाली लड़की प्रोमिला ने
बताया कि आज भी किस तरह से मासिक धर्म अछूता माना जाता है। जिससे सभी महिलाओं एवं बेटियों को बहुत सी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मासिक धर्म आने पर लड़कियों को भी 4 दिन तक बाहर रखा जाता है और महिलाओं को 5 दिन तक। उन्हें घर पर एक अलग कमरे में रखा जाता है। और यदि किसी के घर में एक अलग कमरा नहीं हो तो उन्हें पालतू जानवरों गाय इत्यादि के कमरे में ही एक कोने में रखा जाता है। और उन्हें 4 दिन तक बाहर खुले में ही खाना पड़ता है। ना ही उन्हें 5 दिनों तक किसी भी चीज को हाथ लगाने दिया जाता है और ना ही उन्हें छुआ जाता है उन्हें हर चीज से दूर रखा जाता है।
प्रोमिला ने बताया कि 12 से 14 वर्ष की बेटियों को भी इन सभी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि उनके गांव में लोग ऐसा सोचते हैं कि अगर मासिक धर्म में कोई बेटी या महिला किसी को छू ले तो वह बीमार हो जाएगा। और ऐसा करने से देवी देवता नाराज हो जाएंगे।
प्रोमिला ने लोगों से आग्रह किया है कि इस छुआछूत को बिल्कुल खत्म कर दिया जाए। बेटियों और महिलाओं मासिक धर्म के समय जितना हो सके उतना आराम दे और उनके साथ इस तरह का व्यवहार ना करें।
इन सभी पहलुओं को देखते हुए जनता को जागरूक करने के लिए संबंधित विभाग आगामी कदम उठाने वाले है।


