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एक बार फिर मानवता के लिए आगे आए आर.एस.एस. के स्वयंसेवक

कोविड संभावित मृतक का नियमों के तहत करवाया अंतिम संस्कार

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं एक बार फिर मानवता के लिए मिसाल बने हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला के न्यू-शिमला क्षेत्र से सटे रझयाणा में बीते वीरवार कोविड की संभावना के बीच वीरेंद्र सूद का निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार 75 वर्षीय स्व. वीरेंद्र सूद लोक निर्माण विभाग से बतौर अधिशासी अभियंता सेवानिवृत थे। बीते कुछ दिनों से वे अस्वस्थ चल रहे थे और बुखार की भी शिकायत थी। हृदय रोगी होने के चलते उन्हें हार्ट में स्टंट पड़े थे और वे डायबटिक भी थे। कई बीमारियों की चपेट में होने के बावजूद वे भारी-भरकम शरीर के मालिक थे।

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बीते वीरवार, 13 मई की सुबह तड़के उनकी तबीयत काफी खराब हो गई। इसे देखते हुए परिवार ने 108 एम्बुलेंस को काॅल कर उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला लिया। लेकिन इससे पहले कि उन्हें एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जाता सुबह 7.30 बजे उनका देहांत हो गया। स्वयंसेवकों द्वारा डीडीयू अस्पताल से संपर्क मौके पर डॉक्टर भेज उनकी जांच करने का आग्रह किया गया। ऐसे में अस्पताल प्रशासन द्वारा मौके पर डॉ. हिमानी को भेजा गया और उनकी मौत की पुष्टि कर दी गई। लेकिन इस दौरान स्व. वीरेंद्र सूद की कोविड जांच नहीं हो सकी। जिसका मुख्य कारण घटना स्थल पर पहुंचे चिकित्सक के पास कोविड-19 रैपिड टेस्ट किट न होना तथा अस्पताल द्वारा मृतक का अस्पताल में ही आईसीआरटी टेस्ट होने का हवाला दिया गया, जिसकी रिपोर्ट आने में दो से तीन दिन लगने के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही अस्पताल में टेस्ट न करवा पाने की स्थिति में शव का दाह संस्कार करने के लिए कोविड नियमों के पालन का भी हवाला दे डाला।

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दूसरी ओर अंतिम संस्कार के लिए स्व. विरेंद्र सूद के बडे़ पूत्र विवेक करोल जो चंड़ीगढ़ में रियल इस्टेट का काम करते हैं को कोविड पास आदि की औपचारिकताओं के कारण शिमला पहुंचने में लगातार देरी हो रही थी। कोरोना संभावित होने के चलते शव को अधिक समय तक घर पर रखना परिवार के लिए चिंताजनक था। परिवार पर शव का जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करने का दवाब था, लेकिन पी.पी.ई. किट कहां से मिलेगी ? और किस वाहन से शव को शमशान घाट ले जाया जा सकेगा ? और शमशान घाट में उन्हें अंतिम संस्कार करने की इजाजत मिलेगी या नहीं ? ऐसे कई यक्ष प्रश्न थे जिसके कारण परिवार की चिंता बढ़ी हुई थी।

जब पड़ोस के कई लोग और रिश्तेदार उनके घर पर भी जाने से कतरा रहे थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता कुलदीप कुमार, जगत सहित विजय शर्मा व उनकी धर्मपत्नी नीलम शर्मा जो पेशे से नर्स है परिवार की मदद के लिए आगे आए। शिमला विभाग के संघचालक अजय कुमार के सहयोग से सरस्वती विद्या मंदिर विकासनगर से तीन पीपीई किट सहित कुल छह पीपीई किटों का प्रबंध किया गया। स्वयंसेवकों ने ऐसे में परिवार में मौजूद बच्चों और अन्य बुजुर्गों को सुरक्षित रखते हुए कार्य को अंजाम दिया गया। साथ ही कोविड मृतकों के लिए निर्धारित कनलोग स्थित रोटरी क्लब शमशान घाट में शव को लेकर पहुंचे और वहां मृतक के बड़े बेटे विवेक करोल की मौजूदगी में हिन्दू रीति से अंतिम संस्कार किया गया।

कोट :

मैं चड़ीगढ़ में रियल इस्टेट में कार्यरत हूं। 13 मई को मेरे पिता जी का देहांत हो गया। कोविड संभावित होने के चलते उनका दाह संस्कार करना बड़ा चुनौतिपूर्ण था और मेरे लिए भी तरंतु शिमला पहुंचना संभव नहीं था। ऐसे में आर.एस.एस. के लोगों, जिन्हें मैं भी पहली बार मिल रहा था मेरे परिवार की बड़ी सहायता की। उनकी मदद से से हम पिता जी के शव का कोविड नियमों का पालने करते हुए हिन्दू रिति से अंतिम संस्कार कर पाए।

Deepika Sharma

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