संस्कृति

हिमालय साहित्य संस्कृति और पर्यावरण मंच शिमला द्वारा आयोजित दो दिवसीय कथा संवाद शुरू

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हिमालय साहित्य संस्कृति और पर्यावरण मंच शिमला द्वारा आयोजित दो दिवसीय कथा संवाद शुरू। दीप प्रज्वलित कर सचिव भाषा संस्कृति राकेश कंवर ने किया शुभारंभ। कथा संवाद एक दूसरे लेखक को जानने समझने का अनूठा आयोजन।

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  हिमालय साहित्य संस्कृति और पर्यावरण मंच शिमला द्वारा आयोजित दो दिवसीय कथा-संवाद का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के सचिव भाषा संस्कृति सचिव राकेश कंवर जी ने दीप प्रज्वलित कर किया। उनके साथ अध्यक्षीय मंच, डॉ.देवेंद्र गुप्ता, डॉ. हेम राज कौशिक, डॉ.कर्म सिंह और गंगा राम राजी ने संभाला। कार्यक्रम के शुरू होने से पूर्व वरिष्ठ साहित्यकार अवतार एनगिल और मुरारी शर्मा की दिवंगत माता को दो मिनट का मौन रख कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यह जानकारी मंच के अध्यक्ष एस आर हरनोट ने दी।

 

मुख्य अतिथि राकेश कंवर जी ने इस आयोजन के लिए बधाई देते हुए हिमाचल के लेखकों को विभाग, अकादमी और प्रदेश सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का विस्तार से उल्लेख किया और संस्थाओं से आग्रह भी किया कि वे इन सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि हिमाचल में जो लेखन हो रहा है वह देश में रचे जा रहे साहित्य से किसी भी रूप में कमतर नहीं है।

 

पहले सत्र में चार लेखकों के आपस में संवाद और चर्चा हुई। मुरारी शर्मा, पवन चौहान, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय और भारती कुठियाला ने एक दूसरे के व्यक्तित्व और रचना धर्मिता पर विस्तार से बात की। दूसरे सत्र में इसी तरह गंगाराम राजी, त्रिलोक मेहरा, चंद्रकांता और देवकन्या ठाकुर ने एक दूसरे के लेखन पर सारगर्भित परिचर्चा की। अध्यक्षीय पैनल में डॉ.उषा बंदे, डॉ.विद्यानिधि छाबड़ा, प्रो.मीनाक्षी एफ पॉल में रहे और कार्यक्रम को लेकर संक्षिप्त टिप्पणियां की।

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इस सत्र का मंच संचालन जगदीश बाली जी ने किया।

 

हरनोट ने बताया कि यह पहली बार है जब इस तरह का कथा-संवाद केवल रचनाकारों पर केन्द्रित किया गया है जिससे न केवल हम एक-दूसरे के व्यक्तित्व और कृतित्व को जान सकेंगे बल्कि जो लेखक कहानी विधा में बिल्कुल नए हैं उनकी कहानियों पर भी सकारात्मक आलोचना हो सकेगी। क्योंकि एक आयोजन में हिमाचल भर के कथाकारों पर बात करना संभव नहीं है इसलिए दूसरा कथा संवाद अक्तूबर, 2022 में प्रस्तावित है। इसी तरह कविता-संवाद की शुरूआत भी की जाएगी। दूसरे दिन का कार्यक्रम दस कहानिकारों पर केंद्रित होगा जिनकी कहानियों पर दस आलोचक बात करेंगे।

 

इस आयोजन में हिमाचल और स्थानीय लगभग पच्चास के करीब लेखकों ने उपस्थित दर्ज की जिनमें हिमाचल यूनिवर्सिटी के शोध छात्रों सहित डॉ. उषा बंदे, डॉ.कुल राजीव पंत, डॉ. विद्या निधि, डॉ. सत्यनारायण स्नेही, ओम प्रकाश शर्मा, डॉ.रोशन लाल जिंटा, रत्न चंद निर्झर, दक्ष शुक्ला, रोशन जसवाल विक्षिप्त, वंदना राणा, नरेश देवोग, त्रिलोक मेहरा, हरदेव सिंह धीमान, दीपक शर्मा, दीप्ति सारस्वत, जगदीश कश्यप,राधा सिंह, सतपाल घृतवंशी, स्नेह नेगी, यादव चंद सलहोत्रा, चंद्रकांता, कमला ठाकुर, अनंत आलोक, पंकज दर्शी, प्रियम्वदा, अश्वनी कुमार, देवकन्या ठाकुर, अक्षय कुमार, कुसुम, सवीना जहां, भारती, सतीश, शबनम, पूनम, सुरेखा, सोनाली, बरखा, धीरज के साथ और भी बहुत से साहित्य प्रेमी शामिल रहे।

Deepika Sharma

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