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बड़ा सवाल: महिलाओं को एचआरटीसी की बसों में यात्रा करने पर 50% किराये में क्यों दी छूट?

एचआरटीसी पहले ही घाटे में..

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हिमाचल सरकार द्वारा महिलाओं को बस किराए में 50 फ़ीसदी छूट देने का मामला अब गरमाने लगा है। इसे लेकर हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने सवाल उठाया है कि जब एचआरटीसी घाटे में है तो आखिर ऐसी घोषणा क्यों की गई है?

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हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के अध्यक्ष  समर चौहान, उपाध्यक्ष पूर्ण चन्द शर्मा, सचिव  खेमेन्द्र गुप्ता, प्रवक्ता संजय कुमार, कोषाध्यक्ष श्री जगदीश चन्द एवम् सर्व  हितेंद्र कंवर, गोपाल लाल, देवी चन्द, देस राज, राय सिंह, धनी राम, सुख राम, प्रेम सिंह, अनित कुमार, ऋषि लाल, संजीव कुमार, नवल किशोर, टेक चन्द, विजय कुमार, यशपाल सुल्तानपुरी, सुशील कपरेट, दलीप शर्मा ने संयुक्त ब्यान से कहा है कि हिमाचल दिवस के अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री श्री जय राम ठाकुर द्वारा प्रदेश की महिलाओं को एचआरटीसी की बसों में यात्रा करने पर 50% किराये में छूट देने के निर्णय का स्वागत किया है। वर्तमान में सरकार द्वारा घोषित स्कूली बच्चों, महिलाओं सहित लगभग 26 कैटागिरी के यात्रियों को एचआरटीसी की बसों में फ्री एवं कंसेशनल यात्रा उपलब्ध करवाई जा रही है। जिसका भार एचआरटीसी पर लगभग 800 करोड़ रूपए वार्षिक पड़ता है। एचआरटीसी द्वारा सरकार के आदेशों की अक्षरशः पालना की जाती है और हमेशा की जाती रहेगी। सरकार की घोषणाओं का सीधा प्रभाव एचआरटीसी की आय पर पड़ता है। परन्तु चिन्ता का विषय यह है कि एचआरटीसी के कर्मचारियों को जब उनके वित्तीय लाभ देने की बात आती है तो खुद कमाओ और खुद खाओ की बात की जाती है। जिससे कर्मचारी हतोत्साहित हो रहा है। जबकि वर्तमान में कर्मचारियों के वित्तीय लाभों में अभी भी चालकों-परिचालकों के 36 महीनों के नाइट ओवरटाइम की अदायगी, वर्ष 2018 से के डी ए का एरियर, अनुबंध पर कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मचारियों को नियमित करना, वॉशर ब्वॉय को नियमित करना, चालकों व परिचालकों का आरम्भिक वेतनमान बहाल करना, पेंशन के लिए प्रदेश सरकार के बजट में प्रावधान करना एवं वर्ष 2020 से सेवानिवृत कर्मचारियों के वित्तीय लाभ देना तथा विभिन्न श्रेणियों की वेतन विसंगतियों को दूर कर पंजाब पद्धति के अनुसार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों का लाभ एचआरटीसी के कर्मचारियों को शीघ्र देना इत्यादि अनेक मांगे ज्यों की त्यों लम्बित पड़ी है।

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अतः संयुक्त समन्वय समिति पदेश सरकार से मांग करती है कि सरकार द्वारा घोषित अनेक योजनाओं का लाभ प्रदेश की जनता को तभी दिया जा सकता है यदि एचआरटीसी को

लाभ-हानि की दृष्टि से न देखा जाए एवं इसके कर्मचारियों को आर्थिक लाभ समय पर देकर स्वस्थ रखा जाये। इसलिए परिवहन निगम को रोडवेज का दर्जा देकर पीडब्ल्यूडी, आईपीएच, स्वास्थय, शिक्षा एवं अन्य विभागों की भांति चलाया जाना चाहिए। जिससे इसमें कार्यरत कर्मचारी बिना किसी आर्थिक एवं मानसिक तनाव से देश व प्रदेश की जनता के लिए बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध करवा सकें।

 

 

Deepika Sharma

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