असर विशेष: CBSE स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पर सवाल , मेरिट को लेकर उठी आवाज़
प्रधानाचार्यों की तैनाती मेरिट पर तो शिक्षकों के लिए प्रक्रिया में असमंजस क्यों? शिक्षक बोले—चयन से लेकर स्कूल आवंटन तक एक ही मापदंड हो
शिमला।
प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती को लेकर अब शिक्षक समुदाय में भी आवाज उठने लगी है। लंबे समय से नियुक्ति और तैनाती का इंतजार कर रहे शिक्षकों के बीच इस बात को लेकर सुगबुगाहट बढ़ रही है कि जब पूरी प्रक्रिया को मेरिट आधारित बताया गया है, तो फिर सभी शिक्षकों की तैनाती में मेरिट का स्पष्ट और समान आधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि सीबीएसई स्कूलों के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट के बाद मेरिट सूची जारी की गई थी। परीक्षा में 9,821 शिक्षक शामिल हुए थे और 6,084 शिक्षक मेरिट सूची में आए। इनमें से करीब 5,623 सेवारत शिक्षकों को सरकारी सीबीएसई स्कूलों में तैनाती देने की योजना है। वहीं, 147 प्रधानाचार्यों की काउंसलिंग कर उन्हें मेरिट के आधार पर सीबीएसई स्कूल आवंटित किए जा चुके हैं।
यहीं से अब शिक्षकों के बीच सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि जब प्रधानाचार्यों के लिए मेरिट को आधार बनाकर स्कूल आवंटित किए जा सकते हैं, तो शिक्षकों के मामले में भी वही व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट क्यों नहीं होनी चाहिए? यदि मेरिट ही चयन और तैनाती का आधार है, तो प्रत्येक विषय में मेरिट क्रम, उपलब्ध पद, शिक्षकों से लिए जाने वाले विकल्प और अंतिम स्कूल आवंटन की प्रक्रिया साफ तौर पर सामने आनी चाहिए।
मेरिट में ऊपर तो विकल्प भी पहले क्यों नहीं?
शिक्षकों के बीच यह मांग भी उठ रही है कि जिस शिक्षक की मेरिट बेहतर है, उसे स्कूल चुनने में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। शिक्षा विभाग की प्रस्तावित प्रक्रिया में मेरिट में शामिल शिक्षकों से स्कूलों के विकल्प लिए जाने और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर तैनाती की बात सामने आई है। विज्ञान विषयों के लिए जारी प्रक्रिया में भी मेरिट में आगे रहने वाले शिक्षकों को अधिक स्कूल विकल्प मिलने की व्यवस्था बताई गई है।
शिक्षकों का कहना है कि मेरिट सूची जारी करना मात्र पर्याप्त नहीं है। असली परीक्षा तब होगी जब उसी मेरिट को स्कूल आवंटन तक ईमानदारी और समान रूप से लागू किया जाएगा। उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया में किसी स्तर पर अलग-अलग मापदंड अपनाए जाते हैं तो इससे उन शिक्षकों में असंतोष पैदा होना स्वाभाविक है, जिन्होंने चयन प्रक्रिया में मेहनत कर मेरिट हासिल की है।
हाईकोर्ट ने भी मेरिट के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने को कहा
सीबीएसई स्कूलों में सेवारत शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति का मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकार को 30 सितंबर तक नियमों और मेरिट के आधार पर शिक्षकों तथा प्रधानाचार्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। सरकार को 5 अक्तूबर तक अनुपालना रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी है।
ऐसे में शिक्षकों की नजर अब शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर है। शिक्षकों का कहना है कि जब न्यायालय के समक्ष भी मेरिट आधारित नियुक्ति की प्रक्रिया की बात स्पष्ट है, तो विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि मेरिट सूची से लेकर स्कूल आवंटन तक कौन-सा फार्मूला अपनाया जाएगा।
सरकार की योग्यता आधारित नियुक्ति की बात भी कसौटी पर
मुख्यमंत्री की ओर से भी सरकारी सीबीएसई स्कूलों में आगामी नियुक्तियों को योग्यता के आधार पर और बिना किसी सिफारिश के करने की बात कही गई है। ऐसे में पहले से चयन प्रक्रिया में शामिल सेवारत शिक्षकों की मांग है कि मौजूदा तैनाती प्रक्रिया में भी योग्यता और मेरिट को स्पष्ट प्राथमिकता मिले।
शिक्षकों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति या व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि पारदर्शी और समान प्रक्रिया को लेकर है। उनका सीधा सवाल है—अगर मेरिट है तो पूरी मेरिट दिखनी चाहिए, अगर नियम है तो सभी पर एक समान लागू होना चाहिए और अगर स्कूल आवंटन मेरिट से होना है तो उसका आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।
अब शिक्षक समुदाय चाहता है कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करे, ताकि महीनों से चल रही असमंजस की स्थिति खत्म हो और सीबीएसई स्कूलों में तैनाती की प्रक्रिया बिना भेदभाव, स्पष्ट मापदंड और पारदर्शी मेरिट के आधार पर पूरी हो सके।




