शिक्षा

सेंट थॉमस स्कूल के छात्रों ने ‘कश्मीर के टिंडेल बिस्को में किया हिमाचली संस्कृति का प्रदर्शन

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“काशहिम” – टिंडेल बिस्को व मैलिंसन सोसाइटी और सेंट थॉमस स्कूल, शिमला दवारा एक संयुक्त पहल के तहत कश्मीर में हिमाचली संस्कृति का प्रदर्शन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम की थीम “घाटियों से हिमालय तक का सफ़र” रखी गई थी।

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14 सितंबर को कश्मीर में आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम ने स्कूली विद्यार्थियों को उनकी अनूठी संस्कृति, परंपराओं को प्रदर्शित करने के लिए एक शानदार मंच प्रदान किया। साथ ही, इस दौरान समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के महत्व पर विशेष ज़ोर भी दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत श्री राहुल रेक्स कौल (डायरेक्टर – टीबीएमएस सोसाइटी और सेक्रेटरी – डायोसिस ऑफ़ अमृतसर, सीएनआई) के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मुख्य अतिथि, सम्मानित अतिथियों, गणमान्य व्यक्तियों, अभिभावकों, स्टाफ़ और छात्रों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि को मंच पर जीवंत करने वाले छात्रों और आयोजकों के प्रयासों की भूरी-भूरी प्रशंसा की।

“”काशहिम'” कार्यक्रम टिंडेल बिस्को व मैलिंसन सोसाइटी और सेंट थॉमस स्कूल, शिमला का एक सहयोगात्मक प्रयास था, जिसमें सेंट थॉमस स्कूल के 30 विद्यार्थियों और 5 शिक्षकों ने कश्मीर के टिंडेल बिस्को। स्कूल में हिमाचली संस्कृति का प्रदर्शन किया।

छात्रों की प्रस्तुतिया कार्यक्रम की थीम को खूबसूरती से परिभाषित कर रही थीं और दर्शकों को कश्मीर की हरी-भरी वादियों से लेकर हिमालय की ऊँचाइयों तक के एक यादगार सफ़र पर ले गईं। कार्यक्रमों के मुख्य आकर्षणों में एक शानदार स्वागत नृत्य, हिमाचली और कश्मीरी लोक गीतों की मधुर धुन, ‘हिमशीर’ (कश्मीरी और हिमाचली लोक नृत्यों का एक अनूठा सांस्कृतिक संगम) तथा दोनों संस्कृतियों के प्रसिद्ध नृत्यों ‘रऊफ़’ और ‘हिमाचल नाटी’ का शानदार फ़िनाले शामिल रहा।

संध्या के उत्साह और रोमांच को और बढ़ाते हुए, एक प्रसिद्ध कश्मीरी गायक ने सरप्राइज़ परफ़ॉर्मेंस दी। उनकी मनमोहक और जादुई आवाज़ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सांस्कृतिक उत्सव में संगीत का एक अनूठा रंग भर दिया। उनकी प्रस्तुति की सभी ने भरपूर सराहना की और दर्शकों ने बड़े उत्साह के साथ उनका स्वागत किया।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईजीपी (IGP) कश्मीर, श्री सुजीत कुमार (आईपीएस), कश्मीर ज़ोन शामिल हुए। उन्होंने बच्चों की शानदार प्रस्तुतियों की भूर-भूरी प्रशंसा की तथा छात्रों, शिक्षकों और आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए युवा कलाकारों के उत्साह, आत्मविश्वास और हुनर की दाद दी।
सम्मानित अतिथि, द राइट रेवरेंड मनोज चरण (बिशप – डायोसिस ऑफ़ अमृतसर और चेयरमैन टीबीएमएस सोसाइटी) ने भी सभा को संबोधित किया और अपने विचार साझा किए। उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों के मेल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विविध सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान करने, उन्हेंमाने और संजोकर रखने पर बल दिया। उन्होंने बच्चों की उत्कृष्ट परफ़ॉर्मेंस की तारीफ़ की और इस सांस्कृतिक संध्या को सफल बनाने में जुटे शिक्षकों तथा सभी सहयोगियों के समर्पण को सराहा।

धन्यवाद प्रस्ताव सेंट थॉमस स्कूल, शिमला की प्रधानाचार्या श्रीमती शैरन नंदा ने पेश किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, गणमान्य व्यक्तियों, आयोजकों, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों का बहुमूल्य समय देने, प्रोत्साहन बढ़ाने और इस आयोजन को ऐतिहासिक सफलता दिलाने के लिए दिल से आभार व्यक्त किया।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “काशहिम” जैसे कार्यक्रम संस्कृति, शिक्षा, दोस्ती और आपसी सहयोग के माध्यम से मजबूत रिश्ते बनाने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि “काशिम: लोक संस्कृतियों का संगम” कश्मीर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के एक यादगार उत्सव के रूप में उभरा है, जिसने परंपरा, प्रतिभा और युवा ऊर्जा को एक सूत्र में पिरोकर कश्मीर की वादियों से हिमालय तक की एक अद्भुत यात्रा को साकार किया।

यह सुंदर सांस्कृतिक संध्या एक भव्य सम्मान समारोह के साथ संपन्न हुई, जिसमें मुख्य अतिथि आईजीपी कश्मीर श्री सुजीत कुमार (आईपीएस), विशिष्ट अतिथि राईट रेवरेंड मनोज चरण (बिशप – अमृतसर डायोसिस व चेयरमैन टीबीएमएस सोसाइटी और सेंट थॉमस स्कूल) तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनकी गरिमामयी उपस्थिति, निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करने का एक प्रतीक था।

Deepika Sharma

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