असर विशेष: हिमाचल में भालू-तेंदुए के हमलों पर अब लगेगी लगाम, WII और SACON कोयंबटूर करेंगे त्वरित मूल्यांकन

*वन्यप्राणी प्रभाग, वन विभाग के संयुक्ततत्वावधान में वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया – स्लीम अली फ़ॉर ओरनिथोलॉजि एंड नेचुरल हिस्ट्री कोइमटूर करेगी मानव वन्यजीव संघर्ष पर करेगी त्वरित मूल्यांकन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार वन्यप्राणी प्रभाग को प्रेषित करेगी एक्शन प्लान।।
वन्यप्राणी प्रभाग, वन विभाग के संयुक्ततत्वावधान में वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया – स्लीम अली फ़ॉर ओरनिथोलॉजि एंड नेचुरल हिस्ट्री कोइमटूर करेगी मानव वन्यजीव संघर्ष पर करेगी त्वरित मूल्यांकन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार वन्यप्राणी प्रभाग को प्रेषित करेगी एक्शन प्लान।।
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आज दिनांक 19/09/2026 को वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया – स्लीम अली फ़ॉर ओरनिथोलॉजि एंड नेचुरल हिस्ट्री कोइमटूर की टीम के सदस्यों ने वन्यप्राणी प्रभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल श्री आलोक प्रेम नागर आईएफएस जी के साथ शिमला फारेस्ट हैड क्वार्टर में एक बैठक की। जिसमें वन्यजीव संघर्ष के अध्ययन पर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की , जिसमे सर्वप्रथम मानव भालू संघर्ष एवं मानव तेंदुआ संघर्ष के लिए 10 मंडलो को चयनित किया गया , जहां पर मानव वन्यजीव संघर्ष के मामलों में अधिकता पायी गयी है। , और यह टीम मानव वन्यजीव संघर्ष वर्तमान अवस्था एवं त्वरित मूल्यांकन करके वन्यप्राणी प्रभाग को विभिन्न प्रबंधन कार्ययोजना से अवगत करवाएगी।।
आलोक प्रेम नागर आईएफएस प्रधान मुख्य वन्यप्राणी प्रभाग, वन विभाग के संयुक्ततत्वावधान में वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया – स्लीम अली फ़ॉर ओरनिथोलॉजि एंड नेचुरल हिस्ट्री कोइमटूर करेगी मानव वन्यजीव संघर्ष पर करेगी त्वरित मूल्यांकन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार वन्यप्राणी प्रभाग को प्रेषित करेगी एक्शन प्लान।।*
वन्यप्राणी प्रभाग, वन विभाग के संयुक्ततत्वावधान में वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया – स्लीम अली फ़ॉर ओरनिथोलॉजि एंड नेचुरल हिस्ट्री कोइमटूर करेगी मानव वन्यजीव संघर्ष पर करेगी त्वरित मूल्यांकन और विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार वन्यप्राणी प्रभाग को प्रेषित करेगी एक्शन प्लान।।
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आज दिनांक 19/09/2026 को वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया – स्लीम अली फ़ॉर ओरनिथोलॉजि एंड नेचुरल हिस्ट्री कोइमटूर की टीम के सदस्यों ने वन्यप्राणी प्रभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल श्री आलोक प्रेम नागर आईएफएस जी के साथ शिमला फारेस्ट हैड क्वार्टर में एक बैठक की। जिसमें वन्यजीव संघर्ष के अध्ययन पर विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की , जिसमे सर्वप्रथम मानव भालू संघर्ष एवं मानव तेंदुआ संघर्ष के लिए 10 मंडलो को चयनित किया गया , जहां पर मानव वन्यजीव संघर्ष के मामलों में अधिकता पायी गयी है। , और यह टीम मानव वन्यजीव संघर्ष वर्तमान अवस्था एवं त्वरित मूल्यांकन करके वन्यप्राणी प्रभाग को विभिन्न प्रबंधन कार्ययोजना से अवगत करवाएगी।।
आलोक प्रेम नागर आईएफएस प्रधान मुख्यअरण्यपाल* ने कहा कि इस त्वरित मूल्यांकन से हिमाचल प्रदेश में वन्यजीव मानव संघर्ष (भालू एवं तेन्दुआ) की घटनाओं के विस्तृत कारणों के बारे में पता चलेगा और भविष्य में उन कारणों को कम करने का प्रयास किया जाएगा ताकि मानव वन्यजीव संघर्ष को सभी क्षेत्रों में कम किया जा सके ,और मानव वन्यजीव संघर्ष कारणों को जानने और उन्हें कम करने में यह मूल्यांकन मील का पत्थर साबित होगी , और सभी कारणो के निवारण हेतु वन्यप्राणी प्रभाग वन विभाग ठोस कदम उठाएगा।
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*वहीं श्रीमती प्रीति भंडारी* आईएफएस अरण्यपाल शिमला दक्षिण ने बताया कि यह टीम इस अध्ययन में मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के विभिन्न प्रजातियों भालू और तेंदुआ और हर क्षेत्र के हिसाब से एक्शन प्लान तैयार किए जाएंगे और मानव वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख कारणों के निवारण हेतु प्रयास किये जायेंगे. इस अध्ययन में विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार सभी स्थानीय लोगों से सवांद किया जाएगा और उनको वन्यजीव मानव संघर्ष के प्रति जागरूक किया जाएगा।।।।।ख्यअरण्यपाल* ने कहा कि इस त्वरित मूल्यांकन से हिमाचल प्रदेश में वन्यजीव मानव संघर्ष (भालू एवं तेन्दुआ) की घटनाओं के विस्तृत कारणों के बारे में पता चलेगा और भविष्य में उन कारणों को कम करने का प्रयास किया जाएगा ताकि मानव वन्यजीव संघर्ष को सभी क्षेत्रों में कम किया जा सके ,और मानव वन्यजीव संघर्ष कारणों को जानने और उन्हें कम करने में यह मूल्यांकन मील का पत्थर साबित होगी , और सभी कारणो के निवारण हेतु वन्यप्राणी प्रभाग वन विभाग ठोस कदम उठाएगा।
*वहीं श्रीमती प्रीति भंडारी* आईएफएस अरण्यपाल शिमला दक्षिण ने बताया कि यह टीम इस अध्ययन में मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के विभिन्न प्रजातियों भालू और तेंदुआ और हर क्षेत्र के हिसाब से एक्शन प्लान तैयार किए जाएंगे और मानव वन्यजीव संघर्ष के प्रमुख कारणों के निवारण हेतु प्रयास किये जायेंगे. इस अध्ययन में विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार सभी स्थानीय लोगों से सवांद किया जाएगा और उनको वन्यजीव मानव संघर्ष के प्रति जागरूक किया जाएगा।




