आपदा में चमकी इंसानियत: रकछम की महिलाओं और ग्रामीणों ने पेश की सेवा और साहस की मिसाल
रकछम की महिलाओं और ग्रामीणों ने पेश की मानवता की मिसाल, आपदा की घड़ी में बने 'आपदा रक्षक'


किन्नौर।
ग्राम पंचायत रकछम के मस्तरंग क्षेत्र में गारगे नाले में बादल फटने से आई भीषण आपदा के दौरान जहां चारों ओर तबाही का मंजर था, वहीं रकछम पंचायत के महिला मंडल सदस्यों और ग्रामीणों ने साहस, एकजुटता और निस्वार्थ सेवा का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
मस्तरंग स्थित द्वितीय वाहिनी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के परिसर में अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। गारगे नाले में आए उफान के कारण बाढ़ का पानी आईटीबीपी परिसर में घुस गया, जिससे पूरा कैंप मलबे, विशाल पत्थरों और बोल्डरों से भर गया। जवानों के बैरकों तक पानी पहुंच गया और भोजन सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो गईं।
राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी जवान को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा और जनहानि की कोई सूचना नहीं मिली। हालांकि इस प्राकृतिक आपदा ने यह अवश्य दिखा दिया कि सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्रों में तैनात हमारे सुरक्षा बल किस प्रकार कठिन परिस्थितियों के बीच भी अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं।
आपदा के तुरंत बाद ग्राम पंचायत रकछम के महिला मंडल, युवाओं और समस्त ग्रामीणों ने बिना किसी स्वार्थ के राहत एवं बचाव कार्यों की जिम्मेदारी संभाल ली। सभी ने मिलकर फंसे हुए लोगों और वाहनों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने अपने घरों के दरवाजे पर्यटकों और जरूरतमंदों के लिए खोल दिए तथा अपने घरों में भोजन तैयार कर प्रभावित लोगों, सुरक्षा बलों और राहत कार्य में जुटे कर्मचारियों को भोजन उपलब्ध कराया।
इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों ने प्रशासन, आईटीबीपी तथा अन्य बचाव एजेंसियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सड़कों से मलबा और बोल्डर हटाने जैसे कठिन कार्यों में भी सक्रिय सहयोग दिया। पहाड़ी क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में यह सहयोग राहत कार्यों को गति देने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।
ग्राम पंचायत रकछम की प्रधान श्रीमती सुनीला नेगी, उपप्रधान श्री शमशेर नेगी, वार्ड सदस्य श्रीमती उमा नेगी तथा पंचायत के अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि जब समाज एकजुट होकर सेवा, सहयोग और मानवता की भावना से कार्य करता है, तब कोई भी संकट बड़ा नहीं रह जाता। उन्होंने कहा कि रकछम पंचायत की माताओं, बहनों, युवाओं और सभी ग्रामीणों ने इस आपदा की घड़ी में निस्वार्थ सेवा, आत्मीयता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय देते हुए हर मोर्चे पर मजबूती से खड़े होकर जरूरतमंदों की हरसंभव सहायता की।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाएं कभी भी चुनौती बनकर सामने आ सकती हैं, लेकिन ऐसे समय में स्थानीय समुदाय ही सबसे पहले राहत और बचाव के लिए आगे आता है। रकछम पंचायत के महिला मंडल और ग्रामीणों ने यह सिद्ध कर दिया कि सामाजिक एकता, संवेदनशीलता और सेवा का भाव किसी भी आपदा से लड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है।
रकछम पंचायत के महिला मंडल सदस्यों और ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शित यह सेवा भावना न केवल मानवता की मिसाल है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।


