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किन्नौर की समृद्ध पक्षी विविधता को मिला नया आयाम: ‘Birds of Kinnaur’ का विमोचन एवं ‘Birds of Lahaul-Spiti’ का पुनर्मुद्रण

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शिमला | 31 अक्टूबर 2026

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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की समृद्ध पक्षी विविधता, प्राकृतिक विरासत एवं जैव विविधता के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज दिनांक 31 अक्टूबर को भारतीय वन सेवा की अधिकारी एवं अरण्यपाल वन्यप्राणी वृत शिमला श्रीमती प्रीति भण्डारी IFS द्वारा ‘Birds of Kinnaur’ ब्रोशर का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर ‘Birds of Lahaul-Spiti’ ब्रोशर का पुनर्मुद्रण भी प्रस्तुत किया गया।

वन्यप्राणी मण्डल सराहन, स्पीति, नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (NCF), Royal Enfield एवं eBird के सयुंक्त तत्वावधान में तैयार इन दोनों प्रकाशनों का प्रकाशन शिमला से किया गया है। इनका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की विशिष्ट पक्षी विविधता का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करना तथा आमजन, विद्यार्थियों, युवाओं, शोधार्थियों, पर्यटकों एवं प्रकृति प्रेमियों को पक्षियों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

‘Birds of Kinnaur’ में किन्नौर जिले में पाई जाने वाली 173 पक्षी प्रजातियों, जबकि पुनर्मुद्रित ‘Birds of Lahaul-Spiti’ में 138 पक्षी प्रजातियों की जानकारी एवं चित्र शामिल किए गए हैं। ये प्रकाशन क्षेत्रीय जैव विविधता को समझने, पक्षी अवलोकन को प्रोत्साहित करने तथा शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में उपयोगी संसाधन सिद्ध होंगे।

इन प्रकाशनों की एक विशेष उपलब्धि यह है कि इनमें स्थानीय eBirders एवं पक्षी प्रेमियों द्वारा किए गए पक्षी अवलोकनों तथा विभिन्न प्रजातियों के अभिलेखीकरण में उनके योगदान को भी उचित स्थान दिया गया है। इनमें कुमारी अल्पना नेगी, श्रीमती शिवानी शर्मा, श्री महेश नेगी, श्री प्रशांत चौहान नेगी, श्री गोपाल नेगी, श्री छाया नंद , अक्षय कुमार , संतोष ठाकुर , शिव कुमार एवं गरिमा शामिल हैं। इनके निरंतर प्रयासों, क्षेत्रीय अनुभवों एवं eBird प्लेटफॉर्म पर दर्ज किए गए अवलोकनों ने किन्नौर की पक्षी विविधता के दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

विमोचन कार्यक्रम के दौरान श्री देविंदर चौहान HPFS तथा डॉ. अजय बिजूर वैज्ञानिक, नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन (NCF) एवं eBird सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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इस अवसर पर श्रीमती प्रीति भण्डारी IFS ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के लिए प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के साथ-साथ जनसामान्य को जैव विविधता के महत्व के प्रति शिक्षित एवं जागरूक करना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की ज्ञानवर्धक एवं चित्रात्मक सामग्री विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, स्थानीय समुदायों एवं पर्यटकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होती है। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह की जागरूकता सामग्री तैयार करने पर बल दिया, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक स्थानीय जैव विविधता से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी पहुँचाई जा सके।

उन्होंने इस सराहनीय पहल के लिए वन्यप्राणी मण्डल सराहन, शिमला, नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन, Royal Enfield, eBird तथा सभी स्थानीय पक्षी प्रेमियों एवं सहयोगियों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने आह्वान किया कि वन्यजीव संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय समुदायों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों एवं प्रकृति प्रेमियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी से वन्यप्राणी विभाग द्वारा संचालित विभिन्न जागरूकता एवं संरक्षण गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया।

प्रकृति शिक्षा, नागरिक विज्ञान एवं संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल

ये दोनों प्रकाशन केवल पक्षियों की प्रजातियों का परिचय देने वाले ब्रोशर नहीं हैं, बल्कि स्थानीय जैव विविधता के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, पर्यावरण शिक्षा एवं जनसहभागिता को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण शैक्षणिक संसाधन हैं।

विशेष रूप से eBird जैसे नागरिक विज्ञान मंचों के माध्यम से स्थानीय नागरिकों एवं पक्षी प्रेमियों द्वारा दर्ज किए गए अवलोकन जैव विविधता के अध्ययन, प्रजातियों के वितरण की जानकारी तथा दीर्घकालीन संरक्षण योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आज आवश्यकता है कि हम अपनी प्राकृतिक धरोहर को केवल देखें ही नहीं, बल्कि उसे समझें, उसका अध्ययन करें, उसका दस्तावेजीकरण करें और उसके संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। युवा पीढ़ी को पक्षी अवलोकन एवं प्रकृति अध्ययन से जोड़ना भविष्य के जिम्मेदार पर्यावरण संरक्षकों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

जिस समाज को अपनी जैव विविधता का ज्ञान होता है, वही समाज उसकी रक्षा के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनता है।

किन्नौर एवं लाहौल-स्पीति की प्राकृतिक विरासत को जनसामान्य तक पहुँचाने का यह प्रयास निश्चित रूप से प्रकृति शिक्षा, वैज्ञानिक अभिरुचि एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई प्रेरणा प्रदान करेगा। यह पहल इस विश्वास को भी मजबूत करती है कि स्थानीय स्तर पर किए गए सामूहिक प्रयास ही भविष्य में एक सशक्त संरक्षण आंदोलन का आधार बनते हैं।

Deepika Sharma

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