हिमाचल प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था होगी सुदृढ़
पुलिस एवं विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

शिमला, 12 अक्टूबर 2026
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पंजाब एवं चंडीगढ़ के विश्वविद्यालयों में हाल ही में हुई घटनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश के निर्देशों पर आज पुलिस मुख्यालय, शिमला में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की अध्यक्षता में प्रदेश के 17 निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, नशे एवं साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने तथा आपात स्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए प्रभावी समन्वय पर चर्चा की गई।
बैठक में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी एवं चितकारा यूनिवर्सिटी की हालिया घटनाओं से सबक लेते हुए विश्वविद्यालय परिसरों की *सुरक्षा मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
*बैठक के प्रमुख निर्णय एवं निर्देश:*
विश्वविद्यालयों के प्रवेश एवं निकास द्वारों, छात्रावासों तथा आगंतुकों की निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ करना और निजी सुरक्षा कर्मियों का पुलिस सत्यापन एवं नियमित प्रशिक्षण सुनिश्चित करना।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चल रहे एंटी-चिट्टा जन आंदोलन में विश्वविद्यालयों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना तथा परिसरों के आसपास नशे की गतिविधियों पर रोक लगाना।
अफवाहों एवं भ्रामक सूचनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रत्येक विश्वविद्यालय में अधिकृत प्रवक्ता नामित करना तथा पुलिस के साइबर क्राइम एवं मीडिया प्रकोष्ठ के साथ समन्वय स्थापित करना।
प्रत्येक विश्वविद्यालय में नोडल सुरक्षा अधिकारी नियुक्त करना, संबंधित पुलिस अधीक्षक के साथ नियमित संपर्क बनाए रखना तथा संयुक्त सुरक्षा ऑडिट एवं आपातकालीन कार्यप्रणाली विकसित करना।
डीजीपी ने विश्वविद्यालयों से यातायात स्वयंसेवक योजना, साइबर सुरक्षा जागरूकता और तकनीक के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। पुलिस एवं विश्वविद्यालयों के बीच दीर्घकालिक सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।
डीजीपी ने बताया कि हिमाचल प्रदेश पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं, को 112 हेल्पलाइन एवं महिलाओं की सुरक्षा के लिए उपलब्ध ‘ट्रैक मी’ सुविधा के प्रति जागरूक करने की अपील की।
*डीजीपी ने कहा कि मुख्यमंत्री की परिकल्पना है कि प्रदेश के प्रत्येक शिक्षण संस्थान में विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित महसूस करें और अभिभावकों को अपने बच्चों की सुरक्षा का भरोसा हो।*
*उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य तथा उन्हें नशे और साइबर अपराधों से बचाना पुलिस, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की साझा जिम्मेदारी है।*
उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से किसी भी आपात स्थिति, संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा संबंधी समस्या की सूचना तत्काल 112 पर देने की अपील की।
यह बैठक प्रदेश के विश्वविद्यालयों में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने तथा पुलिस एवं शिक्षण संस्थानों के बीच स्थायी समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

