70 प्रतिशत महिलाओं की संख्या अपने जीवनकाल में हिंसा का अनुभव करती है

ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टीचर ऑर्गेनाइजेशन ने आज देश भर में फेडरेशन से संबद्ध विभिन्न संगठनों के माध्यम से महिला हिंसा उन्मूलन दिवस का आयोजन किया !
उल्लेखनीय है कि महिला हिंसा उन्मूलन दिवस महिलाओ पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिये प्रतिवर्ष 25 नवंबर को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस दिवस के रूप में मनाया जाताहै मनाया जाता है।
आज जारी एक प्रेस ब्यान में आल इंडिया फेडरेशन आफ टीचर्स आरगेनाइजेशन के राष्ट्रिय अध्यक्ष डॉ अश्वनी कुमार , सेक्ट्री जनरल सी.एल.रोज पैटर्न डी.वी.पंडित, रमेश जोशी रमेश भाई पटेल जनार्धन रैंडी पंकज भाई पटेल,
एस .एल .सोमानी ,कार्यकारी अध्यक्ष हितेष भाई पटेल , सलाऊद्दीन ,रश्मि सिंह , वित्त सचिव रणजीत सिंह राजपुत्त , राष्ट्रिय प्रेस सचिव प्रेम शर्मा , सलाहकार राजेंद्र खशिया, उपाध्यक्ष सतपाल भूरा, एन जी रेडडी, श्रीपाल रेडडी,सालिगराम प्रजापति ,श्रीमती शिल्पा नायक चेयरपर्सन महिला विग ,उप सचिव सोनल के पटेल , रजनीश राणा, रंजीत सिंह , अरत भजन साहू ,सचिव डॉ निशा शर्मा ,सोहन मंजिला नॉर्थ जोन कमेटी चेयरमैन केदार रांटा आदि ने बताया कि इस अवसर पर
महिलाओं की समाज में चिंताजनक स्थिति और इसके परिणामस्वरूप, महिलाओं के शारीरिक, मानसिक तथा मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को सामने लाने के लिए रैली, सेमिनार, पोस्टर प्रतियोगिता, निबंध प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया गया !आल इंडिया फेडरेशन के राष्ट्रिय अध्यक्ष डॉ अश्वनी कुमार ने बताया कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक वैश्विक महामारी है। 70 प्रतिशत महिलाओं की संख्या अपने जीवनकाल में हिंसा का अनुभव करती है। कुछ चिंतन और मनन करने से हमें पता चलता है कि महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न, फब्तियां कसने, छेड़खानी, वैश्यावृत्ति, गर्भाधारण के लिए विवश करना, महिलाओं और लड़कियों को खरीदना और बेचना बेचनाआदि यातनाओं का क्रम अभी भी महिलाओं के विरुद्ध जारी है और इसमें कमी होने के बजाए वृद्धि हो रही है। उन्होंने बताया कि भले ही विभिन्न देशो की सरकार वर्तमान में महिला सशक्तिकरण के लिए सराहनीय कार्य कर रही है बावजूद इसके आधुनिक युग में हजारों अल्पसंख्यक ही नहीं आम महिलाएं अपने अधिकारों से कोसों दूर हैं। सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए भले ही सैंकड़ों योजनाएं तैयार की हों, परंतु महिला वर्ग में शिक्षा व जागरूकता की कमी आज भी खल रही है। अपने कर्तव्यों तथा अधिकारों से बेखबर महिलाओं की दुनिया को चूल्हे चौके तक ही सीमित रखा है। है और उनका जीवन आज भी एक त्रासदी की तरह है। आज आवश्यकता इस बात कि है कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाये और महिला उत्पीड़न से सम्बंधित मामलों के निपटारे के लिये विशेष न्यायालय स्थापित किये जाये !



