मरीजों पर संकट: निजी डायलिसिस केंद्रों ने 15 अप्रैल तक दी आखिरी चेतावनी
डायलिसिस केंद्र चला रहे निजी संचालकों पर बढ़ता वित्तीय बोझ, 15 तक भुगतान नहीं हुआ तो बंद होगी सेवा
हिमाचल प्रदेश में किडनी रोग से ग्रसित मरीजों के लिए सरकार द्वारा निजी केंद्रों के माध्यम से दी जा रही डायलिसिस सुविधा अब संकट में घिरती नजर आ रही है। निजी डायलिसिस केंद्र संचालकों को इस सेवा को जारी रखने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
संचालकों का कहना है कि सरकार ने अधिकांश निजी अस्पतालों में हिमकेयर और आयुष्मान कार्ड सेवाएं बंद कर रखी हैं, जबकि केवल किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस सुविधा को सीमित रूप से जारी रखा गया है। इसके साथ ही इस योजना की अवधि हर छह महीने में बढ़ाई तो जा रही है, लेकिन भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में उन्हें केवल एक-दो बार ही लंबित बिलों का भुगतान मिला है, जबकि दवाइयों का खर्च, बिजली बिल, बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन, भवन किराया, स्टाफ वेतन और बैंक ऋण की किस्तें चुकाना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है।
निजी संचालकों ने यह भी बताया कि वे कई बार स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सदन के अंदर और बाहर इस योजना को घोटाले का नाम देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है, जबकि दूसरी ओर हर छह महीने में इसकी एक्सटेंशन दी जा रही है।
प्रदेश में वर्तमान में करीब 30 निजी डायलिसिस केंद्र इस सुविधा को संचालित कर रहे हैं, जिनका करोड़ों रुपये का भुगतान लंबित है।
संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 तारीख तक बकाया भुगतान जारी नहीं किया गया, तो मजबूरन उन्हें डायलिसिस सेवा बंद करनी पड़ेगी, जिससे किडनी मरीजों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।



