विशेष

असर विशेष : ड्राई फ्लावर के रंगों की मुस्कान के पीछे ये उदासी क्यों

ड्राय फ्लावर का कारोबार बढ़ा सकता है रोज़गार, पर प्रशिक्षण व्यवस्था ठप

No Slide Found In Slider.

 बिमला बनना चाहती हैं युवाओं की ड्राई फ्लावर ट्रेनर, लेकिन सिस्टम से नहीं मिल रहा साथ

No Slide Found In Slider.
No Slide Found In Slider.

सरस मेले में ड्राय फ्लावर से सजे स्टाल पर जहाँ रंग और खुशबू लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं इसके पीछे एक ऐसी सच्चाई भी है जो प्रशासनिक उदासीनता की ओर इशारा करती है। सोलन की रहने वाली ड्राय फ्लावरिंग मास्टर ट्रेनर बिमला, जिन्होंने यह कला नोणी यूनिवर्सिटी से सीखी है, आज भी दूसरों को प्रशिक्षण देने की औपचारिक मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही हैं।
असर न्यूज़ से बातचीत में बिमला ने बताया कि उन्होंने सोलन के उपायुक्त (DC) को दो बार आग्रह किया है कि उन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में मान्यता दी जाए और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, ताकि युवा और महिलाएँ इस हुनर को सीखकर आत्मनिर्भर बन सकें। बावजूद इसके, अब तक उन्हें किसी तरह की आधिकारिक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
बिमला का कहना है कि ड्राय फ्लावरिंग ऐसा क्षेत्र है जिसे अभी तक रोज़गार के रूप में गंभीरता से नहीं लिया गया है, जबकि इसमें हिमाचल प्रदेश के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा करने की पूरी क्षमता है। यह काम बारीकी और मेहनत माँगता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलने पर यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
उनके पति शेर सिंह, जो हर कदम पर उनका साथ दे रहे हैं, बताते हैं कि यह काम आसान नहीं है। यदि पैकिंग, ब्रांडिंग और बिक्री की ठोस व्यवस्था की जाए, तो ड्राय फ्लावरिंग को एक मजबूत व्यवसाय के रूप में स्थापित किया जा सकता है।
बिमला का मानना है कि यदि प्रशासन आगे आकर प्रशिक्षण और विपणन के लिए सहयोग करे, तो यह पहल कई लोगों के लिए रोज़गार के द्वार खोल सकती है। फिलहाल सवाल यही है कि क्या उनकी मेहनत और अनुभव को पहचान मिलेगी, या यह हुनर यूँ ही सीमित दायरे में सिमटा रह जाएगा।

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close