सरकारी डेंटल कॉलेज शिमला में AI की दस्तक!
भविष्य के डेंटिस्ट अब सीख रहे हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के स्मार्ट कौशल

शिमला।
सरकारी डेंटल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, शिमला में स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ते आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को समझने और अपनाने के लिए छात्रों ने नया अध्याय खोल दिया है। कॉलेज ने 9 दिसंबर को “आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस: तैयारी और प्रगति” विषय पर दो घंटे का विशेष हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया, जिसने छात्रों को वास्तविक जीवन में AI के उपयोग, संभावनाओं और चुनौतियों का सीधा अनुभव कराया।
यह प्रशिक्षण ADiRA (Artificial Intelligence Reading and Awareness) पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य था—दंत चिकित्सा के छात्रों को AI तकनीकों की तेज़ी से बढ़ रही दुनिया से जोड़ना, ताकि वे आने वाले स्वास्थ्य परिदृश्य के लिए खुद को तकनीकी रूप से सक्षम बना सकें।
IGMC के विशेषज्ञों ने दी गहन AI ट्रेनिंग
सत्र का संचालन सामुदायिक चिकित्सा विभाग IGMC के एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमाणित राष्ट्रीय प्रशिक्षक डॉ. गोपाल आशीष ने किया। उन्होंने AI की वर्तमान स्थिति, भविष्य की दिशा, स्वास्थ्य क्षेत्र में इसके बहुआयामी उपयोग और वास्तविक उदाहरणों के साथ—
✔ AI टूल्स
✔ चैट GPT
✔ नोट कोपायलट
✔ AI आधारित प्रेजेंटेशन
इत्यादि को उपयोग में लाने के तरीकों का विस्तार से प्रशिक्षण दिया।
75 से अधिक छात्रों ने लिया हिस्सा — 120 मिनट का लाइव हैंड्स-ऑन अभ्यास
कार्यक्रम में लगभग 75 डेंटल छात्रों ने भाग लिया। 120 मिनट के इस सत्र में छात्रों को स्वयं AI टूल्स पर काम करने का अवसर मिला। इससे उन्हें क्लीनिकल और शैक्षणिक दोनों परिस्थितियों में AI के उपयोग का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
सत्र के बाद जीडीसी के छात्र डॉ. धीरेंद्र का विस्तृत प्रेजेंटेशन भी हुआ, जिसमें नैतिक उपयोग, सावधानियां और AI टूल्स का जिम्मेदार प्रयोग जैसे महत्वपूर्ण बिंदु सामने रखे गए।
कौशल विकास बैंक द्वारा आयोजन की सराहना
कार्यक्रम की खास उपलब्धि यह रही कि कौशल विकास बैंक ने इस पहल को सराहते हुए इसे स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में डिजिटल साक्षरता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। इसका उद्देश्य था—छात्रों को AI-संचालित चिकित्सा युग के लिए तैयार करना।
प्रिंसिपल डॉ. आयुष गुप्ता ने AI की अनिवार्यता पर दिया जोर
सरकारी डेंटल कॉलेज शिमला के प्रिंसिपल डॉ. आयुष गुप्ता ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की ज़रूरत हैं।
उन्होंने कहा—
“स्वास्थ्य क्षेत्र बेहद तेज़ी से बदल रहा है। आने वाले वर्षों में AI का उपयोग सभी चिकित्सा पेशों में आवश्यक हो जाएगा। इसलिए छात्रों को अभी से तकनीक के साथ सक्षम बनाना हमारी प्राथमिकता है।”
कार्यक्रम के सफल आयोजन से कॉलेज के छात्रों में तकनीकी जिज्ञासा और नवाचार के प्रति उत्साह स्पष्ट रूप से दिखा, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका


