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धर्म: प्रकाशोत्सव

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नाम जपो किरत करो वंड चखो” जैसी शिक्षा पर बल देने वाले, भाई मरदाना की रकाब पर,इक ओंकार का उपदेश सुनाने वाले सिक्खों के प्रथम गुरु बाबा नानक का 556 प्रकाशोत्सवगुरु सिंह सभा शिमला में बड़े हर्षौल्लास के साथ मनाया गया l बाबा के प्रकाशोत्सव पर गुरु सिंहसभा गुरुद्वरा को बुहत ही सुंदर ढंग से सजाया गया था l हजारों की संख्या में श्रदालुओ ने गुरुद्वारासाहिब में माथा टेका और बाबा का आशीर्वाद ग्रहण किया l इस अवसर पर अमृतसर, मोंगा, संगरूरसे आए रागी जत्थों ने शब्द कीर्तन से सासंगत को निहाल किया, ऐसा भक्तिमय मौहल बनाकर येसोचने पर मजबूर कर दिया की हम क्या थे, क्या हो है l गुरु की वाणी हमें कितना निहालकरती है और हम निकल पड़े है काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार की राह पर l

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4 नवंबर से ही गुरुद्वरा सिंह सभा शिमला में शब्द कीर्तन और सुखमनी साहिब के पाठआरम्भ किया l बाह से आए रागी जत्थों द्वारा दीवान सजा और साधसंगत को निहालकिया गया l गुरुपुरव पर्व की शुरआत सुखमनी साहिब के पाठ से प्रात: 4:45 पर हुई l सुबह 6:00से 7:15 तक भाई सुखविंदर सिंह मोंगा वालों ने शब्द कीर्तन द्वारा बाबा नानक की महिमा कागुणगान किया l दोपहर 12:00 बजे तक अमृतसर और संगरूर के रागी जत्थों द्वारा शब्द कीर्तन गागए और 12:00 बजे के बाद गुरु के अटूट लंगर वर्तये l

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ऐसे महान संत का जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवंडी में हुआ l बाबा नानक अपने उपदेशों में कहते हैं की असली सुख आध्यात्मिक प्रफुलता में है l बाबा नाना का जीवन सामान्य नहीं था lउनकी दृष्टि में ऐसा आदित्य आकर्षण था, जो सभी को प्रभावित करता था l बाबा नान एकरूहानी अवतार थे, जिन्हें स्वयं देव द्वार से दीक्षा प्राप्त थी l उनका कहना था कि सच्चा धर्म वही है जो मनुष्य को परमात्मा से जोड़ने का कार्य करें l उन्होंने परमात्मा को निराकार और एकमात्र सहारा माना l उनका यह संदेश था कि मनुष्य को अपना जीवन सत्य और कर्म के आधार पर जीना चाहिए lगुरु नानक साहिब ने समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए समानता का संदेश दिया l

गुरु नानक साहब की शिक्षाओं ने भारतीय समाज में गहरे परिवर्तन की शुरुआत की l गुरु नानक देव की शिक्षाएं आज भी हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के लिए बेहद प्रासंगिक है l

1. एक ईश्वर समता का संदेश :- इसका अर्थ यह है कि किसी भी व्यक्ति को जातपात,लिंग या धर्म के आधार पर कमतर नहीं समझना चाहिए l
2. नाम जपना और सच्चा जीवन जीना :- नाम जपो, ईमानदारी से कमाई करो, भक्ति सिर्फ उपासना नहीं बल्कि सच्चे व्यवहार के माध्यम से भी हो सकती है l
3. सेवा एवं बांटना :- जो कुछ हम कमाते हैं उसे जरूरतमंदों के साथ बांटना चाहिए l
4. भ्रष्टाचार लालच अहंकार क्रोध से दूर रहना :- आजकल जब समाज में तनाव, विभाजन बढ़ रहा है , तो बाबा नान यह शिक्षा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है l
5. सर्वदा दा भला :- गुरु का संदेश सिर्फ अपने तक सीमित न था बल्कि सभी का भला चाहोका भाव उन्होंने बताया l

आज के समय में गुरु जी की शिक्षाएं विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक चुनौतियों के बीच एक प्रकाश स्तंभ की तरह काम कर रही हैं l गुरु नानक साहब ने हर व्यक्ति को प्रेम का सन्देश दियाl उदाहरण के लिए जब दुनिया में विभाजन, धर्म भेद, आर्थिक असमानता बढ़ रही है तब गुरु नानक के संता, सेवा, सच्चाई जैसे आदर्श ज्यादा महत्व रखते हैं l

हमारे लिए बाबा नानक की सीख :- अपने दैनिक जीवन में सत्य बोलना, ईमानदारी से काम करना, जरूरतमंद की मदद करना, आसान ही नहीं लेकिन गहरी सीख है l जब हम लंगर सेवा करते हैं तो सिर्फ दूसरों को मदद नहीं पहुंच जाते बल्कि खुद अपने भीतर दया, नम्रता, एकता को बढ़ावा देते हैं l

जसवीर सूद (डिंपल सूद)

Deepika Sharma

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