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पुरानी पैंशन बहाली के समर्थन में दिल्ली के जंतरमंतर में धरना प्रदर्शन  

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पश्चिम बंगाल को छोड़कर सभी राज्य सरकारो व केन्द्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए नई पेंशन स्कीम लागू की है। इस व्यवस्था को जनवरी 2004 के बाद नियुक्त सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना के स्थान पर नई पेंशन योजना लागू की गई है!आज जारी एक प्रेस बयान में आल इंडिया फेडरेशन आफ टीचर्स आरगेनाइजेशन के राष्ट्रिय अध्यक्ष डॉ अश्वनी कुमार , सेक्ट्री जनरल सी.एल.रोज कार्यकारी अध्यक्ष हितेष भाई पटेल , सलाऊद्दीन ,रश्मि सिंह , वित्त सचिव रणजीत सिंह राजपुत्त , राष्ट्रिय प्रेस सचिव प्रेम शर्मा , उपाध्यक्ष सतपाल भूरा, एन जी रेडडी, श्रीपाल रेडडी,सालिगराम प्रजापति ,श्रीमती शिल्पा नायक चेयरपर्सन महिला विग ,उप सचिव सोनल के पटेल , सहसचिव केसर सिंह ठाकुर, रजनीश राणा , अरत भजन साहू ,सचिव डॉ निशा शर्मा ,सोहन मंजिला ने बताया कि नई पेंशन योजना सही मायने में देखा जाए तो पैंशन योजना है ही नहीं। यह एक बाजारवाद पर आधारित प्रणाली है, जिसमें किसी भी प्रकार की न्यूनतम गारंटी नहीं है। पुरानी पेंशन योजना सरकारी कर्मचारी के बुढ़ापे की लाठी है, तो दूसरी ओर नई पेंशन योजना उसके साथ बहुत बड़ा छलावा है। इस योजना में शामिल कर्मचारी को 60 वर्ष की उम्र के पश्चात मामूली मासिक पेंशन मिलती है, जबकि पुरानी पेंशन योजना में इतनी ही सेवा के बदले अच्छी मासिक पेंशन मिलती हैं। नई पेंशन योजना फायदेमंद नहीं है। इसमें कार्मिकों का पेंशन के नाम पर जमा पैसा यूटीआई, एसबीआई तथा एलआईसी के पास जाता है जो इसको शेयर मार्केट में लगाते हैं। सेवानिवृत्ति के समय जो बाजार भाव रहेगा, उसके अनुसार कार्मिक को पैसा मिलेगा। हो सकता है उसका मूलधन भी उसे ना मिले। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह नितान्त आवश्यक है कि सरकारी कर्मचारियों के हित में सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली पुरानी पेंशन व्यवस्था को तुरंत बहाल किया जाए, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद व्यक्ति स्वाभिमान के साथ जीवन जी सके। संघठन राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अश्वनी कुमार ने प्रश्न किया है कि 2003 के बाद निर्वाचित सांसदों और विधायकों को पेंशन क्यों प्रदान की जा रही है !एक दिन सांसद, विधायक रहने पर भी उनको पेंशन मिलती है, तो कर्मचारियों को पेंशन देने में हिचक क्यों? सरकारी कर्मचारियों को भी पुरानी योजना की तरह पेंशन मिलनी चाहिए, क्योंकि उनका भी परिवार है। 30-35 साल तक की सेवा देने के बाद उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पेंशन राशि हर हालत में मिलना चाहिए। अगर कर्मचारियों को पुरानी पेंशन प्रदान नहीं की जाती है तो राष्ट्रपति, राज्यपाल, प्रधानमंत्री, सांसदों और विधायकों की भी पेंशन बंद की जाना चाहिए।

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फेडरेशन के राष्ट्रिय अध्यक्ष राष्ट्रिय अध्यक्ष डॉ अश्वनी कुमार , सेक्ट्री जनरल सी.एल.रोज, प्रेस सचिव प्रेम शर्मा ने बताया कि कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाल करना जरूरी है। इससे कर्मचारी, राज्य और अर्थव्यवस्था तीनों को लाभ है। वर्तमान एनपीएस प्रक्रिया में कर्मचारी भय के कारण धन संग्रह करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में मांग घटती है। अगर पुरानी पेंशन बहाल होती है, तो इससे लाभ ही होगा। कर्मचारियों को भविष्य की चिंता न होने पर वो भविष्य के लिये धन संग्रह करने की अपेक्षा व्यय करेंगे जिससे अर्थव्यवस्था की मजबूती को बल मिलेगा ! फेडरेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि सांसदों और विधायकों के वेतन-भत्ते जब चाहे बढ़ा दिए जाते हैं। दूसरी तरफ सरकारी विभाग में पूरा जीवन खपा देने वाले व्यक्ति को सम्मानजनक पेंशन तक नहीं मिल रही।

 

सरकार का यह दोहरा रवैया निंदनीय है। उन्होने माँग कि है कि पुरानी पेंशन को जल्द बहाल किया जाये ! आल इंडिया फेडरेशन आफ टीचर आर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि शीघ्र ही संगठन का एक प्रतिनिधिमण्डल इस विषय को लेकर मानव संसाधन एवंम विकास मंत्री से मिलेगा और अगर सरकार शीघ्र कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो संघ सम्बद्ध! संघठनों के साथ मिल कर दिल्ली के जंतरमंतर पर एक बहुत बड़ा धरना प्रदर्शन करेगा !

 

 

Deepika Sharma

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