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सीमाओं से परे कला: ऑकलैंड हाउस स्कूल, शिमला और सेंट थॉमस गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नई दिल्ली के बीच रचनात्मक सहयोग

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शिमला, 22 मई, 2025:

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ऑकलैंड हाउस स्कूल, शिमला को यह गर्व है कि वह सेंट थॉमस गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, नई दिल्ली के साथ मिलकर 19 से 22 मई तक चार दिवसीय “आर्ट कैंप 2025” का आयोजन कर रहा है। यह रचनात्मक पहल दो स्कूलों की छात्राओं और शिक्षकों को एक साझा कलात्मक यात्रा में जोड़ रही है।

 

इस सहयोगात्मक परियोजना के तहत, सेंट थॉमस की 11 छात्राएं और ऑकलैंड हाउस स्कूल की आर्ट क्लब की 12 छात्राएं मिलकर स्कूल की दीवारों और गलियारों को ग्राफिटी, अमूर्त चित्रकला (एब्सट्रैक्ट आर्ट) और वैचारिक चित्रों से सजा रही हैं। यह कार्य केवल रंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि रचनात्मकता और अभिव्यक्ति के माध्यम से स्थानों को जीवंत कहानियों में बदल रहा है।

 

ऑकलैंड हाउस स्कूल की प्राचार्या, श्रीमती स्मारकी सामंतराय ने कहा कि इस तरह के सहयोगात्मक प्रयास केवल कलात्मक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि स्कूलों के बीच मित्रता, साझा सीखने और सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की पहल से छात्राओं का दृष्टिकोण विस्तृत होता है और वे विविधताओं को रचनात्मक ऊर्जा के रूप में अपनाना सीखती हैं।

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सेंट थॉमस गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, जिसकी स्थापना 1930 में डियोसीज़ ऑफ दिल्ली, चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के अंतर्गत हुई थी, एक प्रतिष्ठित संस्थान है। यह टीम इससे पूर्व भी कई सार्वजनिक कला परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण कर चुकी है और अपने अनुभव और नवीन विचारों के साथ इस सहयोग को समृद्ध बना रही है। इस टीम का नेतृत्व कर रही हैं शिक्षिकाएं – सुश्री मेघना आहूजा, सुश्री शिवाली नैयर, सुश्री मीता सिंह और सुश्री मीता माइकल। स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. अनुराधा एमोस शिक्षा और कला क्षेत्र में एक दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता मानी जाती हैं।

 

इस शिविर को और अधिक सार्थक बनाने के लिए, अतिथि छात्राओं को शिमला की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने हेतु विशेष ‘हेरिटेज वॉक’ पर भी ले जाया गया, जहाँ उन्होंने शहर की ऐतिहासिक धरोहर और औपनिवेशिक स्थापत्य का अनुभव किया। साथ ही, सभी छात्राओं और शिक्षकों के लिए एक रोमांचक बोनफायर नाइट का आयोजन भी किया गया, जिसमें संगीत, हंसी और यादगार पलों के साथ एक आनंददायक संध्या बिताई गई।

 

यह कला शिविर केवल एक रचनात्मक पहल नहीं, बल्कि मित्रता, सांस्कृतिक एकता और सामुदायिक भावना का उत्सव बन गया है – जो प्रतिभागियों के मन में हमेशा के लिए एक मधुर स्मृति के रूप में बस जाएगा।

Deepika Sharma

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