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एचआरटीसी और निजी बस संचालक के मध्य की जाने वाली तुलना बिल्कुल तर्कसंगत नहीं

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हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के मुख्य सलाहकार श्री समर चौहान, अध्यक्ष श्री मान सिंह, उपाध्यक्ष श्री खेम चन्द, सचिव श्री खेमेन्द्र गुप्ता, कोषाध्यक्ष श्री जगदीश चन्द एवम् सर्व श्री देस राज, जिया लाल, धनी राम, मिलाप चन्द, गंगा राम, बाल कृष्ण, हितेंद्र कंवर, गोपाल लाल, देवी चन्द, प्रेम सिंह, केशव वर्मा, ऋषि लाल, संजय बड़वाल, संजीव कुमार, पूर्ण चन्द, हरी कृष्ण, मनोज कुमार, ने संयुक्त ब्यान से निजी बस ऑपरेटर संघ के द्वारा आज समाचार पत्रों में एचआरटीसी के खिलाफ दिए गए ब्यान की कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं। निजी बस ऑपरेटर संघ की पर खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे वाली कहावत बिल्कुल उचित बैठती है। निजी बस संचालक न जाने किस भ्रम को पाले हुए हैं कि वो अपनी तुलना एचआरटीसी से करते हैं। एचआरटीसी सरकार का एक उपक्रम है जो गरीबों, वंचितों,अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में लाभ की भावना से नहीं बल्कि सुविधा प्रदान करने की दृष्टि से कार्य करता है।जबकि निजी बस संचालक का उद्देश्य केवल और केवल लाभ अर्जित करना है। एचआरटीसी की कार्य प्रणाली पर सरकार द्वारा लिए निर्णय का प्रभाव पड़ता है जिन्हें सरकार जनता के हित में लेती है। अतः एचआरटीसी की देनदारियों की चिंता निजी बस संचालक न करें। क्योंकि एचआरटीसी और निजी बस संचालक के मध्य की जाने वाली तुलना बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है।

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निजी बस संचालकों को सरकार द्वारा रूट परमिट किसी दबाव में नहीं बल्कि उनकी इच्छा अनुसार मनपसंद दिए गए हैं। यदि निजी बस संचालक अपनी देनदारियों को अदा करने में असमर्थ रहता है तो वो अपने रूट परमिट सरेंडर कर सकते हैं। परिवहन निगम लाभ एवं हानि दोनों तरह की स्थिति में सेवाएं देने के लिए वचनबद्ध है। लेकिन निजी बस संचालक स्वतंत्र है।

निजी बस संचालक केवल एक ही राग पिछले कई सालों से अलाप रहे हैं कि परिवहन निगम ने महिलाओं को पचास प्रतिशत छूट दी है जिससे उन्हें कारोबार में घाटा हो रहा है। उनकी जानकारी के लिए बताते चलें कि ऐसे अनेकों लाभ परिवहन निगम समाज के प्रत्येक वर्ग को दे रहा है।परिवहन निगम ने पचास प्रतिशत की जो छूट महिला यात्री को प्रदान की है वो भी अपने लाभ से काट कर ही दी है। ऐसी रियायतें और कमजोर वर्ग के उत्थान के लिए हम वचन एवं संकल्पबद्ध है। आगे भी ये समाज को लाभ देने का हमारा संकल्प निरंतर जारी रहेगा। ऐसे में यदि निजी बस संचालक परिवहन निगम से प्रतियोगिता करने के हालात में नहीं है तो वे स्वतंत्र है अन्य रोजगार की तरफ पलायन करने के लिए।
निजी बस संचालकों को हम चेतावनी देना चाहते हैं यदि उन्होंने एचआरटीसी की छवि को धूमिल करने वाली बयानबाजी बन्द नहीं की तो हम उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने के लिए विवश हैं।

 

Deepika Sharma

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