भारती कुठियाला ने राज्यपाल को ‘गेयटी के रंगचर’ पुस्तक भेंट की


हर्ष का विषय है कि माननीय कुलाधिपति श्री शिव प्रताप शुक्ल जी से आज शिमला शहर के नामचीन रंगकर्मियों ने मुलाकात की और ‘गेयटी के रंगचर ‘पुस्तक भेंट की।
इस पुस्तक का सम्पादन फिल्म प्रमाणन बोर्ड सदस्या एवं हिमसिने सोसाइटी एक सोच की उपाध्यक्ष भारती कुठियाला ने किया है। इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी जवाहर कौल, आरती गुप्ता पूर्व निदेशक लोक संपर्क एवं जनसंचार विभाग , रंगकर्मी एवं रंगचर श्री देवेन्द्र शर्मा भी उपस्थित रहे।
राज्यपाल महोदय को गेयटी थियेटर रेपटरी के नाटकों की गतिविधियों के बारे अवगत करवाया गया। अभी हाल ही में गेयटी थियेटर रेपटरी द्वारा सक्रियता से नाटकों का मंचन हो रहा है जिसके अन्तर्गत 11 नाटक खेले गये हैं।
‘ गेयटी के रंगचर’ पुस्तक पर बात करते हुए भारती कुठियाला ने बताया कि शिमला शहर की ऐतिहासिक धरोहरों में गेयटी थियेटर का अद्वितीय स्थान है। पूरे विश्व में केवल छह गौथिक शैली में बने थियेटर हैं। ‘गेयटी के रंगचर’ पुस्तक गेयटी थियेटर की ऐतिहासिक यात्रा का दस्तावेज़ है।
इस पुस्तक के तीन भाग हैं।
पहला भाग सम्पादकीय टिप्पणी और गेयटी थियेटर की आरंभिक यात्रा को दर्शाता है। इस में श्रीयुत श्रीनिवास जोशी के का आलेख शिमला शहर के रंगकर्म की आरम्भिक यात्रा पर आधारित है।
दूसरे भाग में गेयटी थियेटर के रंगचरों के संस्मरणात्मक आलेख हैं। इस पुस्तक में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से स्नातक रंगकर्मी सुश्री अमला राय, हिमाचल गौरव पुरस्कार से सम्मानित होने जा रहे केहर सिंह ठाकुर, संगीत नाटक अकादमी द्वारा पुरस्कृत श्री केदार सिंह, श्री संजय सूद सुश्री दक्षा ठाकुर के आलेख शामिल किये गये हैं।
तीसरे भाग में रंगमंच विधा से सम्बंधित जैसे लाईट, साउंड, स्टेज़ क्राफ्ट, मंच सज्जा, अभिनय की बारीकियों पर, श्री अजय शर्मा , संजय सूद, और अन्य रंगशिल्प से जुड़े विद्वानों के लेख हैं। अतः पुस्तक में इस विधा के अन्य पहलुओं का निरीक्षण परिक्षण किया गया है।
मुलाकात के दौरान चर्चा कर सभी रंगकर्मियों ने ज़ोर देखकर कहा कि नयी शिक्षा नीति के अन्तर्गत नाटक विषय स्कूलों में पढ़ाया जाना तय किया गया है, अतः इस बात को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश में ड्रामा विषय में एम ए आरम्भ किया जाना बहुत आवश्यक है ताकि ट्रेड ड्रामा टीचर इस विभाग से पढ़ कर निकलें और रंगकला को बढ़ाने मिले।
फिल्म प्रमाणन बोर्ड की सदस्य एवं हिमसिने सोसाइटी एक सोच की उपाध्यक्ष भारती कुठियाला ने आज राजभवन, शिमला में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से भेंट कर उन्हें अपनी पुस्तक ‘गेयटी के रंगचर’ भेंट की।
राज्यपाल ने भारती कुठियाला के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गेयटी में राज्य की विरासत संस्कृति समाहित है और यहां मंचन किए गए नाटकों को विशेष पहचान मिली है। राज्यपाल ने कहा कि कला अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम है और यह पुस्तक न केवल कलाकारों के लिए बल्कि आम पाठकों के लिए भी ज्ञानवर्धक है। इस मौके पर भारती कुठियाला ने राज्यपाल को अवगत करवाया कि यह पुस्तक गेयटी थियेटर की ऐतिहासिक यात्रा का दस्तावेज है। उन्होंने गेयटी थियेटर के नाटकों के बारे में भी विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि पुस्तक के पहले भाग में संपादकीय टिप्पणियां और गेयटी थियेटर के शुरुआती सफर का जिक्र किया गया है। पुस्तक के दूसरे भाग में गेयटी थियेटर के कलाकारों के संस्मरण प्रकाशित किए गए हैं, जबकि तीसरे भाग में रंगमंच की बारीकियों जैसे प्रकाश, ध्वनि, मंच शिल्प, मंच सज्जा, अभिनय आदि पर नाट्य कला से जुड़े विद्वानों के लेख समाहित किए गए हैं।
बातचीत के दौरान कलाकारों ने राज्यपाल को अवगत करवाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में नाटक विषय पढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आग्रह किया कि राज्य में नाटक विषय में स्नातकोत्तर पाठयक्रम शुरू किया जाना आवश्यक है, ताकि विभाग से प्रशिक्षित नाट्य शिक्षक अध्ययन कर सकें और रंगमंच कला को बढ़ावा मिल सके।
इस अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी जवाहर कौल, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की पूर्व निदेशक आरती गुप्ता और देवेन्द्र शर्मा भी उपस्थित थे।


