विविध

देश-विदेश के शिक्षाविदों, प्रोफेशनल और वैज्ञानिकों ने अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किए शोध-पत्र

हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला की ओर से एपीजी विवि में आयोजित की गई अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस

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हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी शिमला की ओर से बेहतर भविष्य के लिए सशक्त मानव विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फेंस का आयोजन कर रहा है जो कि 12 मई से ऑनलाइन, 13 मई शनिवार को स्थानीय एपीजी शिमला विश्ववविद्यालय के सभागार से ऑफ़लाइन और ऑनलाइन आयोजित किया गया जबकि इस कॉन्फ्रेंस का समापन हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी शिमला में 14 मई को होगा। इस अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हिमाचल प्रदेश सहित देश-विदेश से पधारे शिक्षाविदों, प्रोफेसर, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने बेहतरीन भविष्य के लिए मानव को किस तरह जीवन के हर क्षेत्र में सुखी व रोगमुक्त और आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए सशक्त बनाने के साथ समाज और राष्ट् के विकास में स्वस्थ, कुशल, प्रोफेशनल शिक्षा, गुणात्मक शिक्षा, चिकित्सा, वैज्ञानिक तकनीकी, रोजगार उन्मुख शिक्षा और वर्तमान समय की चुनौतियों से निपटने के लिए मानव के प्रयास और मौजूदा संसाधनों को प्रकृति के अनुरुप प्रयोग करने जैसे कई विषयों पर अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों, प्रोफेसर, विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रोफेशनल व विषय विशेषज्ञों, उद्यमियों, बिज़नेस से जुड़े लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवियों, शोधकर्ताओं और शोधार्थियों ने अपने -अपने शोध-पत्र व शोध-व्याख्यान दिए। इस अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में 250 शोधकर्ताओं ने ऑफलाइन और 5000 ऑनलाइन भाग ले रहे हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमहैं।। इस दूसरे दिन अंतराष्ट्रीय अनुसंधान कॉन्फ्रेंस में बी.के. शर्मा (पूर्व डीआईजी विजिलेंस कमीशन गवर्नमेंट ऑफ इंडिया) ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की जबकि एपीजी शिमला विश्ववविद्यालय के चांसलर इंजीनियर सुमन विक्रांत, प्रो-चांसलर प्रो. डॉ. रमेश चौहान, वाईस-चांसलर प्रो. आर. एस. चौहान कॉन्फ्रेंस के गेस्ट ऑफ ऑनर रहे।

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मुख्य अतिथि बी.के. शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नैनो टेक्नोलॉजी, प्रीवेंटिक हेल्थ, मैटवेर्स जैसे विषयों पर प्रकाश डाला बी. के. शर्मा ने हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान पंथाघाटी शिमला और साइंस एंड मैनेजमेंट सोसाइटी की टीम को इस अंतराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के आयोजन के लिए बधाई दी और मानव और समाज हित में किए जा रहे प्रयासों की प्रसन्नता व्यक्त की। कॉन्फ्रेंस में मुख्य वक्ता डॉ. बी. एस. चौहान ने टिकाऊ और स्वस्थ लंबी आयु व जीवन पर दस सालों में देश-विदेश में किए अनुसंधान व शोधों पर आधारित अपने अनुभव शोधपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किए। वहीं दूसरे मुख्य वक्ता यूनाईटेड किंगडम से रहे डॉ. मेयर विधु जो कि फैमली डॉक्टर के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, भारतीय मूल्यों और परंपराओं के कायल हैं, उन्होंने भारत पर किये शोधों के बारे में बताया कि भारत की संस्कृति, मूल्य महान हैं और भारत से दुनिया जीवन जीना सीख रही है जबकि भारत में लोग अपनी संस्कृति, जीवन मूल्यों से पीछे हटकर पाश्चात्य संस्कृति की ओर आकर्षित हो रहे हैं। दूसरे दिन इस कॉन्फ्रेंस में शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों, विश्ववविद्यालयों से प्राध्याकों और शोधार्थी छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या मे शोध-पत्र प्रस्तुत किए वहीं पंजाब सहित देश के अन्य राज्यों और विदेशों से कई वैज्ञानिक और शोधार्थियों ने जीवन के विकास से जुड़े बहुविकल्पीय विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। ­

Deepika Sharma

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