विविध

अपनी आवाज उठाना कहां तक गलत: विजेंद्र मेहरा

No Slide Found In Slider.

सीटू राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश ने मुख्यमंत्री के हाल के कर्मचारी विरोधी बयान व मुख्य सचिव द्वारा कर्मचारियों के विरोध में निकाली गई अधिसूचना की कड़ी निंदा की है व इसे तनाशाहीपूर्वक कदम करार दिया है। सीटू ने चेताया है कि अगर कर्मचारियों का दमन हुआ,उनकी छुट्टियां बन्द की गईं व वेतन काटा गया,उनका निलंबन व निष्कासन हुआ या फिर किसी भी तरह का उत्पीड़न हुआ तो प्रदेश के मजदूर कर्मचारियों के समर्थन में सड़कों पर उतर जाएंगे व सरकार की तानाशाही का करारा जबाव देंगे।

WhatsApp Image 2026-05-07 at 3.50.10 PM
WhatsApp Image 2026-05-07 at 3.50.21 PM
WhatsApp Image 2026-05-14 at 5.38.45 PM

 

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने कर्मचारियों के खिलाफ मुख्यमंत्री के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है व यह लोकतंत्र विरोधी है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री अपने पद की गरिमा का ध्यान रखें व तानाशाही रवैया न दिखाएं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री व सरकार अपनी नालायकी को छिपाने व नवउदारवादी नीतियों को कर्मचारियों व आम जनता पर जबरन थोपने के उद्देश्य से ही तनाशहीपूर्वक रवैया अपना रहे हैं व उल-जलूल बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि सन 1992 में इसी तरीके की बयानबाजी तत्कालीन मुख्यमंत्री शांता कुमार ने की थी व कर्मचारियों पर तानाशाही नो वर्क नो पे लादा था तो उक्त सरकार का हश्र सबको मालूम है। सरकार से खफ़ा होकर प्रदेश के हज़ारों कर्मचारियों के साथ ही मजदूर वर्ग हज़ारों की तादाद में सड़कों पर उतर गया था व शांता कुमार सरकार को चलता कर दिया था। उस वक्त गर्मियों की छुट्टियां काटने शिमला से निकले शांता कुमार दोबारा शिमला में मुख्यमंत्री के रूप में कभी वापसी नहीं कर पाए। अगले चुनाव में भाजपा दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाई थी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी उसी नक्शे कदम पर आगे बढ़ रहे हैं जिस से भाजपा की दुर्गति होना तय है। इसका ट्रेलर उपचुनाव में सभी चारों सीटों में भाजपा की हार के तौर पर सामने आ चुका है।

WhatsApp Image 2026-05-18 at 5.53.59 PM
WhatsApp Image 2026-05-18 at 5.53.59 PM (1)

 

उन्होंने मुख्यमंत्री से अपना बयान वापिस लेने व कर्मचारियों से माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अनाप-शनाप बयानबाजी कर रहे हैं। अपने अधिकारों के लिए एकजुट होने,यूनियन अथवा एसोसिएशन बनाने,भाषण देने,रैली,धरना,प्रदर्शन व हड़ताल करने का अधिकार संविधान का अनुच्छेद 19 देता है अतः कर्मचारियों के जनवादी आंदोलन को दबाने का बयान देकर मुख्यमंत्री ने उस संविधान की अवहेलना की है जिसकी कसम खाकर वह मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुए थे। मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगाने व वेतन काटने का बयान देश में इमरजेंसी के दिनों की याद दिला रहा है जब लोकतंत्र का गला पूरी तरह घोंट दिया गया था। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को याद रखना चाहिए कि सन 1992 में शांता कुमार सरकार की नैय्या डुबोने वाले एक महत्वपूर्ण अधिकारी अब इस सरकार के आला अधिकारी हैं व लोकतंत्र को कुचलने की अधिसूचना जारी करके सरकार की तानाशाही पर मोहर लगा रहे हैं। कहीं इतिहास खुद को न दोहराए व शांता कुमार सरकार की तरह जयराम जी भी सदा के लिए सत्ता से बाहर न होना पड़े। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह सरकारी कर्मचारियों की वेतन आयोग सम्बन्धी शिकायतों का निपटारा करें। ओल्ड पेंशन स्कीम बहाल करें। कॉन्ट्रैक्ट व्यवस्था पर पूर्ण रोक लगाएं। आउटसोर्स,ठेका प्रथा,एसएमसी,कैज़ुअल,पार्ट टाइम,टेम्परेरी,योजना कर्मी,मल्टी टास्क वर्कर के रूप में रोजगार के बजाए नियमित रोजगार दे। अगर सरकार इन समस्याओं का समाधान करने की पहलकदमी करेगी तो निश्चित तौर से कर्मचारोयों को आंदोलन की आवश्यकता नहीं होगी।

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close