बेटी के सम्मान से लेकर मातृ-शिशु पोषण तक, टुटू में विविध गतिविधियों के साथ पोषण माह का समापन

बाल विकास परियोजना अधिकारी, मशोबरा स्थित टुटू के अंतर्गत आज दिनांक 08-10-2026 को नौवें पोषण माह समापन समारोह के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी, शिमला श्रीमती ममता पॉल जी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ जिला पोषण समन्वयक दिनयांशी जी भी मौजूद रही ll कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि जी के द्वारा पोषण प्लेज लेकर की गयी ll कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री माताओं, शिशुओं तथा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जनसामान्य को जागरूक करना तथा कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान भारतीय परंपराओं एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें गोद भराई, अन्नप्राशन तथा ‘एक बूटा बेटी के नाम’ जैसी गतिविधियां प्रमुख रहीं। गोद भराई के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान उचित पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच एवं देखभाल का संदेश दिया गया। वहीं, अन्नप्राशन गतिविधि के माध्यम से छह माह की आयु पूर्ण कर चुके शिशुओं को मां के दूध के साथ आयु के अनुरूप पौष्टिक पूरक आहार देने के महत्व पर प्रकाश डाला गया। ‘एक बूटा बेटी के नाम’ पहल के माध्यम से बेटियों के सम्मान, पर्यावरण संरक्षण एवं समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री से तैयार पारंपरिक एवं पौष्टिक व्यंजनों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रदर्शनी के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्थानीय एवं मौसमी खाद्य पदार्थों का समुचित उपयोग करके कम लागत में भी संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार तैयार किया जा सकता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी, शिमला ने गर्भावस्था एवं स्तनपान की अवधि में महिलाओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु एवं स्वस्थ समाज की आधारशिला है। गर्भावस्था के दौरान उचित मात्रा में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन एवं अन्य आवश्यक पोषक तत्वों का सेवन माता एवं गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य तथा समुचित विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने परिवार एवं समाज से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं तथा भावनात्मक सहयोग उपलब्ध करवाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
बाल विकास परियोजना अधिकारी, मशोबरा ने अपने संबोधन में कहा कि कुपोषण की समस्या का समाधान केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए परिवार, समुदाय एवं समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के आहार में विविधता बनाए रखने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अनाज, दालों, हरी पत्तेदार सब्जियों, मौसमी फलों एवं दुग्ध उत्पादों को शामिल करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि पोषण केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास तथा एक सशक्त समाज के निर्माण का आधार है। साथ ही उन्होंने परिवार के सदस्यों, विशेषकर पुरुषों से भी महिलाओं एवं बच्चों के पोषण तथा स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के माध्यम से ‘सही पोषण, देश रोशन’ का संदेश देते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, संतुलित आहार के महत्व तथा पोषण संबंधी व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत बाल बिकास परियोजना मशोबरा स्थित टुटू के अंतर्गत बृत पर्यवेक्षक, पोषण समन्वयक मशोबरा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्तायें, आंगनवाड़ी साहिकायें मौजूद रही ll




