महिलाएं अपने हुनर को उद्यमिता में बदलकर आर्थिक रूप से बनें आत्मनिर्भर : पूनम ठाकुर
Helping Hand Foundation के प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन; 30 महिलाओं ने सीखा प्राकृतिक सामग्री से हस्तनिर्मित साबुन बनाना

शिमला, 5 सितंबर।
महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने एवं उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से Helping Hand Foundation, शिमला द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन आज शक्रारा प्रशिक्षण केंद्र, घनहट्टी के समीप किया गया। कार्यक्रम में पूनम ठाकुर, HPRS, सहायक आयुक्त, राज्य कर एवं आबकारी, कार्ट रोड-सह-प्रवर्तन एवं नोडल अधिकारी, जिला शिमला ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की तथा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को महिला उद्यमिता, आर्थिक सशक्तिकरण, ब्रांडिंग, मार्केटिंग एवं स्वरोजगार के संबंध में प्रेरणादायक और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 महिलाओं ने भाग लिया, जिन्हें सुश्री पूनम बंसल द्वारा विभिन्न प्राकृतिक एवं उपयोगी सामग्री जैसे आंवला, हल्दी, एलोवेरा, चुकंदर, नींबू, ग्लिसरीन आदि से विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित साबुन तैयार करने का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को प्राकृतिक सामग्री के उपयोग, साबुन निर्माण की प्रक्रिया तथा उत्पाद को उपयोगी एवं आकर्षक रूप देने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान Helping Hand Foundation के चेयरमैन श्री कपिल कुमार ने भी महिलाओं को संबोधित किया। उन्होंने प्रतिभागी महिलाओं को प्रशिक्षण के माध्यम से अर्जित कौशल को व्यावसायिक गतिविधि में बदलने तथा अपने उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध करवाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब महिलाएं अपने हुनर का उपयोग कर स्वयं की आय का साधन विकसित करें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। उन्होंने महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री, ग्राहकों तक पहुंच और बाजार की आवश्यकताओं को समझने के लिए प्रोत्साहित किया।
“आज आपने साबुन बनाना सीखा है, अब उसे ब्रांड और व्यवसाय बनाना सीखिए”
मुख्य अतिथि पूनम ठाकुर ने महिलाओं द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण केवल एक कौशल सीखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे स्वरोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सफल महिला उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा—
“आज आपने साबुन बनाना सीखा है। अब आपको उसे ब्रांड बनाना, बाजार तक पहुंचाना और उससे आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करना सीखना है।”
उन्होंने महिलाओं से अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने तथा स्वयं को केवल उत्पाद निर्माता के रूप में नहीं, बल्कि एक उद्यमी के रूप में देखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि हस्तनिर्मित साबुन केवल एक उत्पाद नहीं है। जब इसमें आंवला, हल्दी, एलोवेरा, चुकंदर, नींबू, चंदन और अन्य प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है, तो उसके साथ हिमाचल की प्रकृति, स्थानीय संसाधन, परंपरा और महिलाओं की मेहनत की कहानी भी जुड़ जाती है। यही कहानी आगे चलकर उत्पाद की विशिष्ट पहचान और ब्रांड वैल्यू बन सकती है।
स्थानीय उत्पादों को मिले हिमाचली पहचान
पूनम ठाकुर ने सुझाव दिया कि प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं मिलकर अपने उत्पादों के लिए एक साझा और मजबूत ब्रांड विकसित करें, जिसकी पहचान हिमाचल की महिलाओं द्वारा निर्मित गुणवत्तापूर्ण हस्तनिर्मित उत्पाद के रूप में हो।
उन्होंने महिलाओं को ब्रांड नाम, लोगो, टैगलाइन, आकर्षक पैकेजिंग, उत्पाद की सही कीमत निर्धारित करने, लागत एवं लाभ का हिसाब रखने तथा बाजार की मांग को समझने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी उत्पाद की सफलता के लिए केवल अच्छा उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं है। गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग और ग्राहक संतुष्टि पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा—
“उत्पाद बिकता है, लेकिन उसकी कहानी ब्रांड बनाती है।”
डिजिटल मार्केटिंग को बनाएं व्यवसाय का माध्यम
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में छोटे से छोटे उद्यम को भी बड़े बाजार तक पहुंचाया जा सकता है। महिलाओं को WhatsApp Business, Instagram तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
उन्होंने सुझाव दिया कि महिलाएं अपने उत्पादों की केवल तस्वीरें ही साझा न करें, बल्कि यह भी बताएं कि उत्पाद किसने बनाया, कैसे बनाया और उसके पीछे क्या कहानी है।
उन्होंने कहा—
“केवल उत्पाद की तस्वीर मत दिखाइए, उस महिला की कहानी भी बताइए जिसने उस उत्पाद को अपने हाथों से बनाया है।”
उन्होंने कहा कि इस प्रकार ग्राहकों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनेगा और महिला उद्यमों को बाजार में अलग पहचान मिलेगी।
पर्यटन से जोड़ें स्थानीय महिला उत्पादों को
पूनम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों के लिए बड़ा बाजार उपलब्ध है। उन्होंने महिलाओं को होटल, होमस्टे, गिफ्ट शॉप, प्रदर्शनियों, मेलों, कॉर्पोरेट गिफ्टिंग तथा त्योहारों और विवाह समारोहों के लिए गिफ्ट हैम्पर तैयार करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि “Handmade in Himachal” जैसे विचार के साथ इन उत्पादों को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई पर्यटक हिमाचल से स्थानीय महिला द्वारा निर्मित उत्पाद अपने साथ लेकर जाता है, तो वह केवल एक वस्तु नहीं खरीदता, बल्कि हिमाचल की प्रकृति, संस्कृति और यहां की महिलाओं की मेहनत की एक कहानी अपने साथ लेकर जाता है।
सामूहिक प्रयासों से बन सकता है बड़ा महिला उद्यम
पूनम ठाकुर ने महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से कार्य करने के साथ-साथ महिला समूह अथवा Self Help Group आधारित सामूहिक उद्यम विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि एक महिला उत्पादन, दूसरी पैकेजिंग, तीसरी लेखा-जोखा, चौथी डिजिटल मार्केटिंग और अन्य महिलाएं बिक्री एवं बाजार से जुड़ने की जिम्मेदारी संभाल सकती हैं।
उन्होंने कहा—
“एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा मत कीजिए, एक-दूसरे की ताकत बनिए।”
उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से एक छोटा कौशल एक बड़े उद्यम में बदल सकता है और भविष्य में यह उद्यम अनेक अन्य महिलाओं के लिए रोजगार एवं आय के अवसर पैदा कर सकता है।
गुणवत्ता और नियामकीय आवश्यकताओं पर भी दिया जोर
उन्होंने महिलाओं को उत्पाद की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग एवं लेबलिंग में निरंतरता बनाए रखने की सलाह दी। साथ ही व्यावसायिक स्तर पर उत्पादों का विपणन करते समय संबंधित कानूनी एवं नियामकीय आवश्यकताओं का पालन सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा—
“सुंदर पैकेजिंग ग्राहक को पहली बार आकर्षित कर सकती है, लेकिन गुणवत्ता ही ग्राहक को दोबारा आपके पास लेकर आती है।”
“अवसर तलाशने वाली नहीं, अवसर पैदा करने वाली बनें महिलाएं”
पूनम ठाकुर ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ केवल महिलाओं को अवसर उपलब्ध करवाना नहीं है, बल्कि उन्हें इस योग्य बनाना है कि वे स्वयं के लिए और दूसरों के लिए भी अवसर पैदा कर सकें।
उन्होंने कहा कि आर्थिक स्वतंत्रता महिलाओं को केवल आय का साधन नहीं देती, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान, निर्णय लेने की क्षमता और समाज में अपनी पहचान भी प्रदान करती है।
उन्होंने महिलाओं को संदेश देते हुए कहा—
“सीखिए, सृजन कीजिए, विश्वास कीजिए, कमाइए और सशक्त बनाइए।”
उन्होंने कहा कि एक हुनरमंद महिला स्वयं आत्मनिर्भर बन सकती है, लेकिन एक हुनरमंद, आत्मविश्वासी और उद्यमशील महिला एक पूरा व्यवसाय खड़ा कर सकती है और अनेक अन्य महिलाओं के लिए रोजगार एवं अवसर पैदा कर सकती है।
मुख्य अतिथि का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान पूनम ठाकुर को Helping Hand Foundation की ओर से सम्मानित एवं अभिनंदित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने संस्था द्वारा महिलाओं को कौशल प्रदान करने तथा उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की।
प्रशिक्षण प्राप्त सभी महिलाओं ने Helping Hand Foundation एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें न केवल एक नया हुनर सीखने का अवसर मिला, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने, स्वयं की आय का साधन विकसित करने और भविष्य में अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने का आत्मविश्वास भी मिला।
महिलाओं ने कहा कि उन्हें पहली बार यह समझने का अवसर मिला कि उनके हाथों से तैयार किया गया एक छोटा उत्पाद भी यदि गुणवत्ता, सही कीमत, अच्छी पैकेजिंग और उचित मार्केटिंग के साथ बाजार में लाया जाए, तो वह आय का एक स्थायी साधन बन सकता है।
कार्यक्रम के अंत में पूनम ठाकुर ने सभी 30 प्रशिक्षित महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज का यह समापन समारोह उनके प्रशिक्षण का अंत नहीं, बल्कि उनकी उद्यमशील यात्रा की शुरुआत होना चाहिए।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि Helping Hand Foundation से प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा तैयार उत्पाद आने वाले समय में केवल शिमला तक सीमित न रहकर हिमाचल, देश के विभिन्न हिस्सों तथा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार तक अपनी पहचान बनाएंगे।
उन्होंने कहा—
“आपके हाथ केवल उत्पाद बनाने वाले हाथ नहीं हैं; ये हाथ अपना भविष्य बनाने, अपनी पहचान बनाने और दूसरी महिलाओं के लिए अवसर पैदा करने की क्षमता रखते हैं।”
इस अवसर पर Helping Hand Foundation के पदाधिकारी, चेयरमैन श्री कपिल कुमार, प्रशिक्षक सुश्री पूनम बंसल, प्रशिक्षण प्राप्त 30 महिलाएं तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



