EXCLUSIVE: मरीज ने खोली कफ सिरप की बोतल तो दिखा संदिग्ध पदार्थ, जांच जरूरी
दवाइयों की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। खांसी-जुकाम के उपचार के लिए इस्तेमाल किए जा रहे एक कफ सिरप की बोतल में फफूंद जैसी सामग्री दिखाई देने के बाद मरीज ने इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। मरीज का नाम मधु है ये दवा शिमला में ख़रीदी गई है
सीलड बोतल के ढक्कन में जमा पदार्थ

मधु के अनुसार, उन्होंने खांसी की शिकायत के चलते यह सिरप खरीदा । शिकायतकर्ता के मुताबिक ये एक आयुर्वेदिक सिरप है । बोतल के ऊपर असामान्य पदार्थ दिखाई दिया, जो फफूंद जैसा नजर आ रहा था। इसके बाद उन्होंने सील नहीं खोली और ना ही उसका इस्तेमाल किया । मामले की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें बोतल के ऊपर ओर गहरे रंग की परत/जमा हुआ पदार्थ दिखाई दे रहा है।
सिरप की पैकेजिंग पर इसे सामान्य सर्दी-जुकाम, सूखी या काली खांसी और ब्रोंकाइटिस जैसी समस्याओं में उपयोगी बताया गया है। पैक पर निर्माण संबंधी विवरण, बैच नंबर और निर्माता कंपनी का नाम भी दर्ज है। बैच नंबर 002 और निर्माण तिथि 10/2025 पैकेजिंग पर अंकित है।
क्या वास्तव में फफूंद है, जांच के बाद ही होगा स्पष्ट
हालांकि बोतल में दिखाई दे रही सामग्री फफूंद जैसी प्रतीत होती है, लेकिन केवल तस्वीर देखकर इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की जा सकती। यह भी संभव है कि पदार्थ किसी अन्य कारण से बना हो। इसलिए पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए दवा के नमूने की प्रयोगशाला जांच जरूरी है।
ऐसे मामलों में संबंधित औषधि नियंत्रण विभाग और स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। संबंधित अधिकारियों से मांग है कि शिकायत का संज्ञान लेते हुए संबंधित बैच का नमूना लिया जाए और उसकी गुणवत्ता, संरचना तथा माइक्रोबायोलॉजिकल जांच कराई जाए। यदि जांच में दवा गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
जनता के लिए जरूरी अलर्ट
दवा खरीदते और इस्तेमाल करते समय उपभोक्ताओं को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी सिरप या अन्य तरल दवा में फफूंद, असामान्य तलछट, रंग में बदलाव, बदबू, तैरते हुए कण या बोतल में असामान्य परत दिखाई दे तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में दवा को तुरंत फेंकने के बजाय उसकी बोतल, पैकेट, बैच नंबर, निर्माण एवं समाप्ति तिथि और खरीद का बिल सुरक्षित रखना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग को जांच के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
यह मामला फिलहाल शिकायत और दिखाई दे रही सामग्री पर आधारित है। दवा में वास्तव में फफूंद या किसी प्रकार का संदूषण है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण अधिकृत प्रयोगशाला जांच के बाद ही किया जा सकेगा। इसलिए जनता सतर्क रहे और दवा की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की शंका होने पर उसका सेवन जारी न रखे।




