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आउटसोर्स कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: नीति दो या सड़क पर उतरेंगे 35 हजार कर्मचारी

मुख्यमंत्री के आश्वासन और बयान में विरोधाभास से कर्मचारियों में असमंजस, आंदोलन की चेतावनी

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हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों को लेकर एक बार फिर मुद्दा गरमा गया है। आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कमल चौहान ने प्रेस नोट जारी करते हुए सरकार से स्पष्ट और पारदर्शी नीति की मांग की है।

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उन्होंने कहा कि बजट अभिभाषण में मुख्यमंत्री द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षा को लेकर सकारात्मक आश्वासन दिया गया था, जिसका महासंघ ने स्वागत भी किया। लेकिन इसके विपरीत विधानसभा में विधायक जनक राज के प्रश्न के उत्तर में यह कहा जाना कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए कोई स्थायी या दीर्घकालिक नीति विचाराधीन नहीं है, कर्मचारियों में गहरी निराशा और भ्रम पैदा कर रहा है।

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महासंघ ने सवाल उठाया है कि क्या सरकार आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण को जारी रखना चाहती है या उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाएगी। महासचिव ने कहा कि हर बार कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही दिया जाता है, लेकिन अब समय आ गया है कि वादों को नीति में बदला जाए।

महासंघ ने स्पष्ट किया कि आगामी चुनावों में आउटसोर्स कर्मचारी और उनके परिवार उसी दल का समर्थन करेंगे, जो उनके लिए स्थायी नीति बनाकर उसे लागू करेगा।

अध्यक्ष कमल चौहान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेश के लगभग 35,000 आउटसोर्स कर्मचारी लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने सरकार से स्थिति की गंभीरता को समझते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की, ताकि कर्मचारियों का विश्वास बहाल हो सके।

Deepika Sharma

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