शिक्षा

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल: सरकारी सीटें खाली, छात्र निजी संस्थानों की ओर मजबूर

सरकारी डाइट की सीटें भरने की मांग, शिक्षा बोर्ड की भूमिका पर उठे सवाल

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हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में संचालित सरकारी डाइट संस्थानों में डीएलएड के सैकड़ों पद रिक्त पड़े होने के बावजूद इच्छुक अभ्यर्थियों को अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है। इसके विपरीत निजी संस्थानों में डीएलएड सीटों पर भारी शुल्क वसूले जाने से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर लाखों रुपये का आर्थिक बोझ पड़ रहा है। डॉ. मामराज पुंडीर पूर्व प्रान्त महामंत्रीअखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघहिमाचल प्रदेश के मुताबिक़  ऐसी स्थिति में यह धारणा बन रही है कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की कार्यप्रणाली निजी संस्थानों को लाभ पहुंचाने वाली प्रतीत हो रही है, जिससे पारदर्शिता और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुलभ एवं किफायती अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि उन्हें महंगी निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर होने के लिए बाध्य करना।

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प्रदेश के  मुख्यमंत्री एवं शिक्षामंत्री से आग्रह है कि इस विषय पर शीघ्र संज्ञान लेते हुए सरकारी डाइट संस्थानों में रिक्त सीटों को तुरंत भरा जाए, प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए तथा छात्रों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण का समान अवसर मिलना राज्य की जिम्मेदारी है। आशा है कि सरकार इस दिशा में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।

Deepika Sharma

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