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तो क्या शिक्षा निदेशकों में टकराव..?

सूचना का अभाव या अधिकारों की लड़ाई?

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शिमला।
प्रदेश के शिक्षा विभाग में इन दिनों दो निदेशालयों के बीच समन्वय की कमी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा सभी जिलों के उपनिदेशक उच्च शिक्षा को भेजे गए एक हालिया पत्र ने प्रशासनिक असमंजस की स्थिति को उजागर कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि यह महज सूचना के अभाव का परिणाम है या फिर अधिकार क्षेत्र को लेकर अंदरूनी खींचतान?

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ज्ञात हो कि पहले वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के संचालन, शिक्षकों एवं गैर-शिक्षकों के स्थानांतरण सहित कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन थे। लेकिन विद्यालय शिक्षा निदेशालय के अलग गठन के बाद जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया। सूत्रों के अनुसार अभी तक शिक्षकों और गैर-शिक्षकों के कैडर का स्पष्ट विभाजन नहीं हो पाया है, जिससे कार्यप्रणाली में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के मुद्दों पर निदेशालय स्तर पर आपसी पत्राचार और समन्वय के माध्यम से समाधान निकाला जाता, तो जिला स्तर के अधिकारियों को असमंजस में नहीं डाला जाता। उपनिदेशकों को सीधे निर्देश भेजने से प्रशासनिक प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है।

शिक्षा विभाग में चल रही इस खींचतान का असर जमीनी स्तर पर विद्यालयों के संचालन और स्थानांतरण प्रक्रिया पर पड़ सकता है। अब देखना यह होगा कि विभाग इस स्थिति को स्पष्ट दिशानिर्देशों के माध्यम से सुलझाता है या यह विवाद आगे और गहराता है।

Deepika Sharma

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