शिक्षा

छह माह बीतने के बाद भी 600 से अधिक शिक्षक बिना वेतन कार्यरत

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हिमाचल प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को संभाले रखने वाले शिक्षक आज स्वयं आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। सेवा-निवृत्ति न लेने और सेवा-विस्तार पर कार्य कर रहे प्रदेश के 600 से अधिक शिक्षक पिछले छह महीनों से बिना तनख्वा के कार्य करने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल अमानवीय है, बल्कि शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
डॉ. मामराज पुंडीर, पूर्व प्रान्त महामंत्री, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, हिमाचल प्रान्त ने कहा कि सरकार ने शिक्षकों से यह अपेक्षा तो की कि वे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न होने दें, लेकिन बदले में उन्हें समय पर वेतन और मानदेय देने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रही है। शिक्षक अपने परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और दैनिक खर्च बैंक ऋण के सहारे चला रहे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
डॉ. पुंडीर ने तथाकथित चाटुकार शिक्षक संगठनों पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि ये संगठन केवल मंच साझा करने और प्रशंसा करने तक सीमित रह गए हैं। जिन मुद्दों पर शिक्षकों के हक के लिए मुखर आवाज उठनी चाहिए थी, वहां इन संगठनों की चुप्पी सरकार को गलत संदेश दे रही है और शिक्षकों के साथ अन्याय को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस गंभीर विषय पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। डॉ. पुंडीर ने कहा कि सरकार को बिना किसी और देरी के सभी प्रभावित शिक्षकों का बकाया वेतन और मानदेय जारी करना चाहिए तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्पष्ट और व्यवहारिक नीति लागू करनी चाहिए।
अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो शिक्षक समाज में गहरा असंतोष फैलेगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और उसके नीति-निर्माताओं की होगी।

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Deepika Sharma

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