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Asar EXCLUSIVE: हिमाचल की झांकी को हरी झंडी! 2026 परेड में दिखेगी ‘वीरों की भूमि’ की गौरवगाथा

गणतंत्र दिवस परेड-2026 में हिमाचल की ‘वीरों की भूमि’ झांकी होगी शामिल

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हिमाचल को मिली बड़ी मंज़ूरी!

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नई दिल्ली/शिमला।

हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का बड़ा क्षण आ गया है। वर्ष 2026 की गणतंत्र दिवस परेड के लिए हिमाचल द्वारा भेजा गया झांकी प्रस्ताव औपचारिक रूप से मंज़ूर हो गया है। रक्षा मंत्रालय के ‘कृतज्ञता का मंत्र–वंदे मातरम्’ विषय के अंतर्गत हिमाचल की सैनिक वीरता पुरस्कार विजेताओं की गाथा पर आधारित भव्य झांकी अब राजपथ (कर्तव्य पथ) पर दिखाई देगी।

इस झांकी में हिमाचल की वीर परंपरा, शौर्य और मातृभूमि के प्रति समर्पण को केंद्र में रखा गया है। राज्य के उन शहीदों और वीर जवानों की कहानी प्रस्तुत की जाएगी जिन्होंने अपनी वीरता, बलिदान और राष्ट्र प्रेम से देश का मान बढ़ाया।

हिमाचल का यह चयन इसलिए भी खास है क्योंकि उत्तर भारत का यह पर्वतीय राज्य अभी तक देश के 1203 वीरता पदक विजेताओं का प्रतिनिधित्व कर चुका है, जिनमें परमवीर चक्र, अशोक चक्र व महावीर चक्र विजेता भी शामिल हैं। यह किसी भी राज्य की ओर से वीरता का अद्वितीय प्रमाण है।

झांकी का थीम — “वीरों की भूमि हिमाचल”

झांकी में दर्शाया जाएगा कि किस तरह हिमाचल के युवा तीनों सेनाओं तथा CAPF — CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB में बड़ी संख्या में भर्ती होकर देश की सीमाओं की रक्षा करते आए हैं।

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प्रस्ताव चयन की प्रक्रिया पूरी — अब तैयारी शुरू

उप मुख्यमंत्री तथा प्रभारी मंत्री भाषा-संस्कृति विभाग के निर्देशानुसार बनायी गई विशेषज्ञ समिति ने झांकी के डिजाइन को अंतिम रूप दिया।जिसमे सचिव भाषा संस्कृति विभाग , और निदेशक  की टीम का भी योगदान सराहनीय रहा है

जवाहरलाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला के कलाकारों ने इसका रूपांकन तैयार किया।
कुछ सप्ताह पूर्व भेजा गया प्रस्ताव अब रक्षा मंत्रालय की स्क्रीनिंग कमेटी से पास होकर अंतिम स्वीकृति पा चुका है।

परेड-2020 की सफलता के बाद दोबारा मौका

ध्यान रहे कि 2020 में हिमाचल की ‘राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत’ विषय पर आधारित झांकी ने पूरे देश में अलग पहचान बनाई थी। अब एक बार फिर हिमाचल की झांकी परेड-2026 में देशभर का ध्यान आकर्षित करेगी।

युवाओं को प्रेरित करेगा संदेश

इस झांकी का उद्देश्य केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि युवाओं में देशभक्ति, सेवा और समर्पण की प्रेरणा जगाना है। वीरता की इन कहानियों से नई पीढ़ी को समझाया जाएगा कि हिमाचल की पहचान सिर्फ देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है।

Deepika Sharma

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