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विरोध: 2003 के नियमों के आधार पर टी.जी.टी. के युक्तिकरण का विरोध

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हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ निदेशक स्कूल शिक्षा, हिमाचल प्रदेश द्वारा दिनांक 26 मई 2025 को जारी किए गए, पत्र में दिए गए दिशा निर्देशों जो कि हिमाचल प्रदेश के टीजीटी वर्ग का युक्तिकरण वर्ष 2003 में जारी एक अधिसूचना के अंतर्गत करने से सम्बंधित है | himachalप्रक्रिया का विरोध करता है ।

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विरोध: 2003 के नियमों के आधार पर टी.जी.टी. के युक्तिकरण का विरोध स्कूल शिक्षा निदेशक महोदय द्वारा जारी इस पत्र के साथ 1 मार्च 2003 के तत्कालीन दिशाराजकीय अध्यापक संघ इसका विरोध करता है क्योंकि ये 2003 में उपलब्ध विद्यालयों व छात्रों की संख्या पर आधारित है, जिसमें कक्षा छठी से दसवीं तक की किसी कक्षा में 60 से अधिक विद्यार्थियों की संख्या होने पर अलग सेक्शन बनाने का प्रावधान है तथा यदि यह संख्या इससे कम है तो उन विद्यालयों में ऐसे टीजीटी की पोस्ट सरप्लस मानी जाती है और इस पोस्ट को युक्तिकरण के तहत कहीं और स्थानांतरित कर दिया जाता तथा उस विद्यालय विशेष में यह पोस्ट समाप्त मानी जाती है ।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ 2003 के नियमों के आधार पर युक्तिकरण के फैसले को तर्कहीन मानता है तथा इस फैसले का विरोध करता है । वर्तमान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत, अध्यापक विद्यार्थी अनुपात 1:30 तय किया गया है तथा विशेष सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर यह 25 विद्यार्थियों तक भी किया जा सकता है।
विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दिए गए प्रावधानों को नजर अंदाज कर 2003 के नियमों को जबरन लागू कर टीजीटी काॅडर व शिक्षर्थी हित की अनदेखी करने जा रही जो हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ को कतई मंजूर नहीं है तथा अगर निदेशक स्कूल शिक्षा महोदय ने 26 मई को जारी पत्र को शीघ्र अति शीघ्र वापस नहीं लिया तथा जबरन 22 साल पुराने नियमों के आधार पर युक्तिकरण किया गया तो हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ किसी भी सीमा तक इसका विरोध करने में संकोच नहीं करेगा | अगर युक्तिकरण जरूरी हुआ तो संघ मांग करता है कि इसे नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप किया जाए |
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ माननीय मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री महोदय से भी अपील करता है कि इस विषय पर निजी रूप से नजर रखें तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप ही युक्तिकरण की प्रक्रिया को पूर्ण करें । क्योंकि 2003 के नियमानुसार 2025 में युक्तिकरण करना प्रासंगिक नहीं है । 2025 में जहां गुणवत्ता शिक्षा की बात प्रदेश सरकार कर रही है, वहां राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों को नजर अंदाज कैसे किया जा सकता है ? 2003 में निजी विद्यालयों की संख्या कम थी जिस कारण विद्यार्थियों की संख्या अधिक थी, तथा सरकारी स्कूलों की संख्या भी बहुत कम थी जिसके चलते विद्यार्थियों की संख्या एक कक्षा में 60 से अधिक होना स्वाभाविक था । 2009 से शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के कारण, शिक्षा के सर्वभामिकरण के चलते विद्यालयों की संख्या में बहुत अधिक बृद्धि हुई है जिस कारण विद्यार्थियों की संख्या कम हुई। लिहाजा़ 2003 के नियमों के आधार पर युक्तिकरण करना न्यायोचित नहीं होगा। यह प्रेस विज्ञप्ति सामूहिक रूप से संघ
के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष नरोत्तम वर्मा, महासचिव संजीव ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज शर्मा तथा सुरेश नरयल, वित्त सचिव सुरेंद्र पुंडीर तथा राज्य कार्यकारिणी के अन्य सदस्यों के अलावा विभिन्न जिला प्रधानों में शिमला के महावीर कैथला, मंडी के अश्वनी गुलेरिया, सिरमौर के हरदेव सिंह, काँगड़ा के नरेश धीमान, सोलन के गुरमेल सिंह, चम्बा के परस राम, बिलासपुर के यशवीर रनौत व सभी खंड अध्यक्षो द्वारा जारी किया गया |

 

Deepika Sharma

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