सम्पादकीय

असर संपादकीय : मां की नजर में कोरोना के चिंताजनक परिणाम बच्चों पर

तनुजा शर्मा की कलम से...

 

तनुजा….

कोरोना वायरस एक ऐसी बीमारी है जिसमें पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। इससे कोई भी बच नहीं पाया चाहे वह बुजुर्ग हो या जवान। अब इस बीमारी ने बच्चों को अपनी जकड़ में लेना शुरू कर दिया है। इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर देखा जा रहा है।

 

 एक मां की नजर से अगर हम बच्चों को देखें तो वह एक ही है जो अपने बच्चों को इतना करीब से जानती है। बच्चे आजकल कितने तनाव में चल रहे हैं यह एक मां ही बता सकती हैं। कोरोना महामारी के कारण बच्चों के मन पर पढ़ रहे इस असर से उन्हें किस तरह बचाया जा सकता है। बच्चों की जिंदगी इस महामारी के कारण बिल्कुल बदल गई है। बच्चों में तनाव,चिड़चिड़ापन अक्सर मां-बाप को देखने में आ रहा है। 

 

 

बच्चे बीते 2 साल से घर पर हैं। जिस कारण उनके शैक्षणिक स्तर के साथ-साथ personality development भी खत्म हो गई है। बच्चे घर से निकलना तो चाहते हैं मगर इस बीमारी ने माता-पिता को इतना कमजोर कर दिया है कि वह चाहकर भी अपने बच्चों को घर से निकलने नहीं देते। 

 

बच्चों जिस समय मानसिक व शारीरिक विकास होता है उस समय को इस बीमारी ने जकड़ लिया है। इसने 6 साल के बच्चों को घर पर ही ऑनलाइन क्लास लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे बच्चों की आंखों पर असर पड़ रहा है। 4 से 6 साल के बच्चों का कहना है कि उन्हें स्कूल में ही पढ़ना अच्छा लगता था। घर पर ऑनलाइन क्लासेस होती तो है पर उन्हें स्कूल में ऑफलाइन पढ़ना ही अच्छा लगता था।

 

बच्चों के माता-पिता का कहना है कि बच्चे हर समय फोन पर ही रहते हैं।जिससे उनकी आंखों पर मानसिक व शारीरिक विकास पर असर पड़ रहा है। माता-पिता जितना भी चाहे वह इस स्थिति से निपट नहीं सकते। वह यही चाहते हैं कि अगले साल सब कुछ ठीक हो जाएं और उनके बच्चे स्कूल में पढ़ने लगे।

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