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पुलवामा आतंकी हमले को लेकर सत्यपाल मलिक के खुलासे की जांच होनी चाहिए

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पुलवामा आतंकी हमले के दौरान जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक द्वारा लगाए गए आरोप चौंकाने वाले हैं। इस संदर्भ में केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए कि पुलवामा में शहीद हुए सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत का ज़िम्मेदार कौन है। तथ्य यह है कि पुलवामा आतंकी हमले के समय जो राज्य के राज्यपाल थे, उन्होंने ही यह गंभीर खुलासा किया है कि खुफिया एजेंसियां ​​पूरी तरह से विफल रही हैं। मामले की गंभीरता इस बात से आंकी जा सकती है कि जब सैन्य काफिला सड़क मार्ग से यात्रा कर रहा था, तब सुरक्षा सावधानियों का पालन नहीं किया गया था। भाजपा और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, जो चुनाव जीतने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा को भी एक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, ने अभी तक आरोपों का जवाब नहीं दिया है।

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सत्यपाल मलिक ने खुलासा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जब उन्होंने पुलवामा हमले के दौरान स्थिति से निपटने में केंद्र सरकार की विफलता के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की, तो उन्हें प्रधानमंत्री ने चुप रहने के लिए कहा। हमले के बाद से, विभिन्न हितधारकों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट और राय थी कि सेना के सुरक्षित मार्ग के लिए आवश्यक परिस्थितियों को बनाने में केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय द्वारा दिखाई गई शिथिलता और आपराधिक लापरवाही के कारण पुलवामा आतंकी हमला हुआ जिसमें कई जवानों की जान चली गई। सत्यपाल मलिक के खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि पुलवामा आतंकी हमला एक गंभीर सुरक्षा चूक के कारण हुआ था। अब, प्रधानमंत्री और सरकार को भारत के लोगों को यह बताने के लिए ज़िम्मेदार होना चाहिए कि उन्होंने सीआरपीएफ के पांच विमानों को एयरलिफ्ट करने के अनुरोध से इनकार क्यों किया, जिससे निश्चित रूप से 40 भारतीय जवानों के बहुमूल्य जीवन को बचाया जा सकता था।

 

चूंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, इसलिए देश के सभी लोगों ने राजनीतिक मतभेदों की परवाह किए बिना इन त्रासदियों में सरकार के साथ एकजुटता की घोषणा की है। लेकिन, सत्यपाल मलिक के हालिया खुलासों ने भाजपा के उस अमानवीय चहरे को उजागर किया है जो कि राजनीतिक लाभ के लिए हमारे सैनिकों की जान तक को जोखिम में डाल रही है। इस गंभीर खुलासे से उठे सवालों से भाजपा सरकार भाग नहीं सकती है। संघ परिवार की राजनीति हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।

 

स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफ़आई) विश्वविद्यालय इकाई पुलवामा आतंकी हमले और उससे जुड़ी घटनाओं की न्यायिक जांच की मांग करती है।

 

Deepika Sharma

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