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खास खबर : जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को कोविड से खो दिया, उनको गोद लेने के लिए कई संदेश सोशल मीडिया में भ्रामक

बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया है कानूनी

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कोरोना महामारी से मरने वाले माता-पिता के बच्चों के पुनर्वास के संबंध में प्रक्रिया

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कोविड महामारी के कारण माता-पिता को खोने वाले बच्चों के पुनर्वास के संबंध में प्रक्रिया तैयार की है।

 

सरकार के संज्ञान में यह आया है कि जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को कोविड से खो दिया है, उनको गोद लेने के लिए कई संदेश सोशल मीडिया में प्रसारित हो रहे हैं। आम जनता को सलाह दी जाती है कि वे इस तरह की कार्रवाई को शामिल करने या प्रोत्साहित करने से बचें, जो कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन में है।

 

जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को कोविड से खो दिया है, उनकी मदद करने की कानूनी प्रक्रिया नीचे दी गई है:

 

1. किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 (इसके बाद अधिनियम के रूप में उल्लिखित) की धारा 2(14) के तहत, बिना माता-पिता या देखभाल करने वाले बच्चों को देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके तहत बनाए गए अधिनियम और नियमों में इन बच्चों के लिए संस्थागत और गैर-संस्थागत देखभाल के साथ-साथ सेवा वितरण संरचनाओं का एक सुरक्षा जाल अनिवार्य है। यह ऐसे बच्चों के पुनर्वास के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया भी निर्धारित करता है।

 

2. इस प्रकार, यदि किसी बच्चे के माता-पिता को कोविड से खोया हुआ पाया जाता है, उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, तो बच्चे को यात्रा के समय को छोड़कर, 24 घंटे के भीतर जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।

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3. राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि वे असाधारण मामलों में बातचीत के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें जहां वर्तमान परिस्थितियों में कोविड संबंधित प्रतिबंधों के कारण शारीरिक संपर्क संभव नहीं है।

 

4. माता-पिता दोनों को खोने वाले किसी भी बच्चे की जानकारी चाइल्डलाइन (1098) के साथ साझा की जा सकती है। स्थानीय चाइल्डलाइन इकाई 24 घंटे के भीतर सीडब्ल्यूसी के समक्ष बच्चे को पेश करने में मदद करेगी। स्थानीय चाइल्डलाइन इकाई भी आवश्यकता पड़ने पर बच्चे की भलाई की निगरानी में सीडब्ल्यूसी की सहायता करेगी।

 

5. सीडब्ल्यूसी बच्चे की तत्काल आवश्यकता का पता लगाएगी और बच्चे के पुनर्वास के लिए उचित आदेश पारित करेगी ताकि या तो बच्चे को देखभाल करने वालों के लिए बहाल किया जा सके या मामला दर मामला आधार पर उसे संस्थागत या गैर-संस्थागत देखभाल में रखा जा सके। अधिनियम के तहत निर्धारित अनुसार, अपने परिवेश में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए और उनके हितों की रक्षा करते हुए, जहाँ तक संभव हो, बच्चों को उनके परिवार और सामुदायिक वातावरण में बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

 

6. यदि बच्चे को किसी भी प्रकार की रिश्तेदारी देखभाल में बहाल किया जाता है, तो सीडब्ल्यूसी नियमित रूप से बच्चे की भलाई की जांच करता रहेगा।

 

7. अधिनियम की धारा 74 के तहत प्रावधान के अनुसार, बच्चे को अनुचित संकट से बचाने के लिए उसकी पहचान की रक्षा के लिए देखभाल की जानी चाहिए।

 

8. इन जिम्मेदारियों को निभाते समय सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।

 

9. अनाथ बच्चों को गोद लेने के इच्छुक व्यक्ति वैध दत्तक ग्रहण के लिए केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (cara.nic.in) से संपर्क कर सकते हैं।

Deepika Sharma

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