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35 साल की नौकरी करने के बाद बुढ़ापे में ठेंगा…

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हिमाचल प्रदेश पेंशन बहाली सँयुक्त मोर्चा(PRUFHP) ने प्रदेश के  मुख्यमंत्री से वर्ष 2003 से बन्द की गई पुरानी पेंशन व्यवस्था को राज्यस्थान, छत्तीसगढ़ व झारखंड की तर्ज पर पुनः बहाल करने की मांग उठाई है। सँयुक्त मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष मनोज ठाकुर महामंत्री एल ड़ी चौहान , अमर शर्मा, दीप ठाकुर, अशोक राजपूत पवना राणा व उपासना वालिया ने कहा कि एनपीएस में कर्मियों का पैसा सुरक्षित नही है जरूरत पर कर्मचारियों को खुद का पैसा भी नही मिलता और 30-35 साल की नौकरी करने के बाद बुढ़ापे में नाममात्र की पेंशन का दिखावटी प्रावधान है वो भी शेयर मार्केट पर आधारित जो कि हर वक्त कर्मियों के लिए चिंता का विषय है। एल डी चौहान ने कहा कि देश के 3 राज्यों ने पेंशन बहाल करके कर्मचारियों के सौ प्रतिशत वोट को एकतरफा कर दिया है अब प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी समय रहते पेंशन बहाल कर देनी चाहिए और हिमाचल प्रदेश को पेंशन बहाली के इतिहास में चौथे राज्य का दर्जा दिलवाना चाहिए, क्यूंकि पेंशन को अब बहाल करना ही पड़ेगा ये निश्चित है लेकिन तुरंत बहाल करके प्रदेश के कर्मियों का समर्थन हासिल करना है या बहाल न करके विरोध हासिल करना है ये वर्तमान सरकार को सोचना होगा।

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कर्मचारियों की जिस पेंशन व्यवस्था को ब्रिटिश राज ने भी जारी रखा और सराहा उस व्यवस्था को विकसित भारत के नेताओ ने छीनकर खुद की पेंशन को किस चालाकी से बढ़ाया ये अत्यंत गम्भीर है। चौहान ने कहा कि यदि कॉर्पोरेट सेक्टर व शेयर मार्केट की पक्षधर ये सरकारें है तो खुद की पेंशन व्यवस्था NPS माध्यम से करें व कर्मचारियों की पेंशन पुरानी व्यवस्था से ही शुरू करें।

 

Deepika Sharma

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