विविध

असर संपादकीय: खड़ाहण का ठिर्शु 

हिमाचली भाषा व लोक संस्कृति श्रृंखला -367

WhatsApp Image 2026-09-18 at 12.00.19 PM

 

 

 हिमवाणी  द्वारा हिमाचली भाषा व लोक साहित्य को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई साहित्यकार श्रृंखला के अंतर्गत  प्रस्तुत है जिला शिमला  से वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय धर्म पाल भारद्वाज जी द्वारा रचित जानकारी पूर्ण लेख____

ashb advt_page-0001

ठिर्शु शब्द सुनते ही पैर थिरकने लगते हैं। वैशाख का उल्लास है ठिर्शु। वैशाख के मेले ऊपरी हिमाचल में कई स्थानों पर लगते हैं। तारीख निश्चित रहती हैं। जैसे कि शिमला जिले की ननखड़ी तहसील के खड़ाहण गांव में 7-8 वैशाख को ठिर्शु होता है। अंग्रेजी कैलैंडर में यह तारीख 20-21 अप्रैल को पड़ती है। खड़ाहण, देवता जिशर के प्राचीन मंदिर के लिए जाना जाता है। इसी मन्दिर के प्रांगण में ठिर्शु होता है।

देवता जिशर के दोनों रथ वैशाख फेरे में कुछ निश्चित गांवों का दौरा करते हैं। बड़े देवता रैक परगने का और छोटे देवता सामत परगने का। ठिर्शु के दिन दोनों रथ वापस आते हैं। इस बार दोनों का मिलन मन्दिर पहुंचने से पहले ही आई.टी.आई. के पास हो गया। 

No Slide Found In Slider.

 

पंचांग के अनुसार आज से गर्मी का मौसम शुरू होता है। सूरज की किरणें गर्मी बरसाने में लगी हैं। खड़ाहण मन्दिर, हाटू और कोट पर्वत से निसृत हो रही दो सरिताओं के संगम स्थल पर स्थित है। ये जल धारायें बारह मासी हैं। पानी है तो पानी से पनपने वाले लम्बे कुनश के पेड़ भी हैं जो गर्मी को नम करने में लगे हैं। 

इस साल ठिर्शु में शामिल होने, दलाश कुल्लू के प्रसिद्ध देवता जगेश्वर 20 अप्रैल को खड़ाहण पहुंचे। उन के साथ भारी संख्या में लोग आये हैं। सभी पैदल, दलाश से खड़ाहण तक। तामझाम भी भारी। जगेश्वर महादेव के स्वागत के लिये खज़ाना अर्थात चांदी का बाजा निकाला गया। बजन्तरी तैयार थे, मन्दिर के तमाम कार्यकर्ता तैयार थे। देवता जिशर के दोनों रथ स्वागतार्थ पूरी राजसी ठसक के साथ मन्दिर परिसर से बाहर निकले। देवता जगेश्वर और देवता जिशर की मिलनी शब्दों में क्या बयान करें, जबकि उन पलों को ठहरा कर रखने के लिए वीडियो हैं।  

पहले दिन का आकर्षण यही था। नाटी तो देर रात तक चलती रही। मैलन कोटगढ़ के देवता चतुर्मुख, जो जिशर देवता के मंझले भाई हैं, इस मेले में शिरकत करेंगे। धूमधाम रहेगी, ज़ाहिर है।

 

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close