सम्पादकीय

असर संपादकीय: अकड़ के रहना, अपनी शान समझते हैं….

प्रेम सागर की कलम से..

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सब इंस्पेक्टर प्रेम सागर की कलम से

अकड़ के रहना, अपनी शान समझते हैं

दे मूछों को ताव , अपनी आन समझते हैं

तुमसे है रोशन, तुम्ही से है आबाद

हिंदुस्तान …………जिंदाबाद ।।

माटी से यह तिलक करते,

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केसरी रंग लगाते हैं

राम की धरा पर जन्मे ,

गंगा में रोज नहाते हैं

वतन पर मर मिटना, अपनी आन समझते हैं

दे मूछों को ताव, अपनी शान समझते हैं

मां देती है दुआएं , बहन करती है फरियाद

हिंदुस्तान…………. जिंदाबाद।।

हिंदुस्तान …………..जिंदाबाद ।।

जय हिंद जय भारत…… प्रेम से

Deepika Sharma

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