विविध

जाइका प्रोजेक्ट से शीत मरूस्थल में आ रही हरियाली

किन्नौर के श्यासो गांव में बना 76 हजार लीटर की क्षमता वाला वाटर स्टोरेज टैंक

No Slide Found In Slider.


-स्थानीय जनता ने श्रमदान से भी दिया निर्माण कार्य में सहयोग

No Slide Found In Slider.

 

No Slide Found In Slider.

शिमला। प्रदेश के शीत मरूस्थल क्षेत्रों में हरियाली लाने के लिए जाइका परियोजना की पहल का परिणाम सामने आने लगा है। ऐसे में जाहिर है कि जाइका प्रोजेक्ट से शीत मरूस्थल में हरियाली आने लगी है। जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी यानी जाइका वानिकी परियोजना के तहत जिला किन्नौर के श्यासो गांव में 76 हजार लीटर की क्षमता वाला सिंचाई जल भंडारण टैंक तैयार किया गया। इस कठिन एवं शीत भौगोलिक परिस्थिति के दायरे में आने वाले इस गांव की जनता के जज्बे को भी सलाम करना होगा। यह इसलिए कि वहां की जनता ने श्रमदान के माध्यम से एक लाख के अतिरिक्त बजट को कवर किया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जाइका प्राजेक्ट के तहत 76 हजार लीटर वाटर स्टोरेज टैंक निर्माण कार्य पूरा करने के लिए 6 लाख रुपये का खर्चा आया। जाइका की ओर से 5 लाख का बजट दिया गया और एक लाख का काम वहां के स्थानीय लोगों ने श्रमदान के माध्यम से किया। ऐसे में अब इस क्षेत्र में जल भंडारण टैंक के होने से पौधरोपन के बाद उन्हें सींचने में पानी की कमी नहीं सताएगी। इसके साथ-साथ इस वाटर स्टोरेज टैंक का लाभ वहां के लोगों की भूमि सुधार में भी मिलेगा। यही नहीं, बल्कि यहां कृषि योग्य भूिम पर कृषि भी हो पाएगी। जाइका प्रोजेक्ट के माध्यम से जल भंडारण टैंक बना तो लोगों ने खेतों तक सिंचाई जल की सप्लाई के लिए कुहलों का निर्माण भी कर दिखाया। इस परियोजना के तहत वहां की महिलाओं की आर्थिकी के सुधार के लिए स्वयं सहयाता समूह का गठन कर प्रशिक्षण का आयोजन एवं मशीनरी खरीदने में आर्थिक सहायता प्रदान कर रहा है। बता दें कि इस गाव में इससे पहले सिंचाई के लिए इस तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। जाइका परियोजना ने यहां टैंक निर्माण कर किसान एवं बागवानों को बेहतर सुविधा दी।
बाक्स:
बागवानों को मिली सिंचाई की बेहतर सुविधा

जाइका वानिकी परियोजना के तहत जिला किन्नौर के श्यासो गांव में निर्मित जल भंडारण टैंक से अब वहां के किसान एवं बागवानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा भी मिल रही है। गौरतलब है कि किन्नौर का श्यासो गांव काफी दुर्गम है और यहां बारिश न होने के कारण किसान एवं बागवानों को सिंचाई में काफी दिक्कतें आती हैं। हालांकि यहां कृषि एवं बागवानी लोगों की आर्थिकी का मुख्य साधन है, लेकिन सिंचाई के पानी की कमी के चलते लोगों को काफी परेशानियां होती थी। मगर जब से जाइका प्रोजेक्ट से यहां 76 हजार लीटर की क्षमता का टैंक तैयार किया उसके बाद यहां के किसान एवं बागवानों की तकदीर बदलने लगी है।
कोट:
हाल ही में हमारी टीम ने जिला किन्नौर के श्यासो गांव में निर्मित 76 हजार लीटर की क्षमता के जल भंडारण टैंक का निरीक्षण किया। जाइका परियोजना के तहत क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों से यहां के लोगों में काफी उत्साह है, जाइका परियोजना से लोगों को लाभ मिल रहा है। दूरदराज गांव श्यासो में वाटर स्टोरेज टैंक होने से यहां के किसान एवं बागवानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी।
-डा. सुशील काप्टा,
वानिकी एवं जैव विविधता विशेषज्ञ, जाइका।

Deepika Sharma

Related Articles

Back to top button
Close