संस्कृति

भलकु स्मृति कालका-शिमला रेल यात्रा में इस तरह रहा साहित्य सफर

 

कोविड नियमों की सख्त अनुपालना के साथहिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच की भलकु स्मृति कालका-शिमला रेल व पैदल साहित्य/पर्यावरण यात्रा संपन्न। रेलवे के चार धिकारियों को भी किया सम्मानित।

 

हिमालय साहित्य संस्कृति व पर्यावरण मंच द्वारा बाबा भलकु की स्मृति में आयोजित रेल व पर्यावरण यात्रा के साथ साहित्य गोष्ठी देर रात रेलवे अधिकारियों और स्थानीय लोगों की भागीदारी के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। शिमला रेलवे स्टेशन पर उत्तरी रेलवे के यांत्रिक अभियंता कौस्तुभ मणि और शिमला स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक प्रिंस सेठी ने 35 लेखकों का स्वागत कर उनकी रेल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रेलवे स्टेशन पर शिमला की साईं संस्था ने प्रत्येक लेखक को एक एक पौधा और कालका शिमला रेलवे सोसाइटी ने रेलवे स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस यात्रा में रेलवे के उपरोक्त अधिकारियों के अलावा अमर सिंह ठाकुर, जोगेंद्र और संजय गेरा भी शामिल रहे। चलती रेल में कई सत्रों में लेखकों, शामिल छात्रों, कलाकारों और साहित्य प्रेमियों ने कविताएं, गीत, गजलें और संस्मरण सुनाए। हिमालय मंच के अध्यक्ष व लेखक एस आर हरनोट ने इस रेल और पैदल यात्रा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि भलकु एक साधारण मजदूर था परंतु उसकी सोच और दूरदर्शिता विलक्षण थी। उसने न केवल इस रेलवे लाइन के सर्वेक्षण में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि हिंदुस्तान तिब्बत रोड पर अंग्रेजों के साथ काम भी किया और कई पुलों के निर्माण में भी सहयोग दिया जिस की वजह से अंग्रेजों ने उसे ओवरशीयर की उपाधि प्रदान की। यह यात्रा पहाड़ के ऐसे ही कामगारों के सम्मान की यात्रा है और साथ ही साहित्य, संस्कृति और पर्यावरण जागरूकता के लिए भी।

लेखकों ने रेल से कनोह रेलवे स्टेशन तक और उसके बाद कंडाघाट रेलवे स्टेशन तक पैदल यात्रा की। कंडाघाट में रेलवे अधीक्षक दिनेश शर्मा के साथ स्थानीय आरोहणम् ग्रुप के युवा सदस्यों ने फूल माला पहनाकर भव्य स्वागत किया साथ ही शामिल लेखकों के साथ मिलकर पौधरोपण भी किया। 

साहित्यिक गोष्ठी 2 बजे स्टेशन पर शुरू हुई। सबसे पहले हिमालय मंच ने इस यात्रा में अपना स्नेह, मार्गदर्शन देने के लिए रेलवे के पांच अधीक्षकों को सम्मानित किया जिनमें कौस्तुभ मणि, मुख्य यांत्रिक अभियंता, उत्तर रेलवे, प्रिंस सेठी, स्टेशन अधीक्षक शिमला, अमर सिंह ठाकुर, वरिष्ठ वाणिज्य निरीक्षक, दिनेश शर्मा, स्टेशन अधीक्षक, कंडाघाट और संजय गेरा, स्टेशन अधीक्षक, समर हिल रेलवे स्टेशन शामिल थे। रोशन जसवाल ने अपनी नई पुस्तक “मैं बच्चा होना चाहता हूं” में से एक सुंदर कविता सुनाई और पुस्तक हरनोट को भेंट की। 

कंडाघाट के अति वरिष्ठ लेखक भारत कुमार, जिन्होंने दर्जनों पुस्तकें सृजित की है का शॉल और पुष्प भेंट कर रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक दिनेश शर्मा और एस आर हरनोट ने उन्हें सम्मानित किया। साथ ही युवा कवियत्री तन्वी शर्मा को भी शॉल पुष्प भेंट कर सम्मानित किया। दोनों रचनाकारों ने अपनी नई पुस्तकों को लेखकों को भेंट किया।

सत्र का आरंभ स्थानीय ज्योतिष शास्त्र के विद्वान राजीव शूर ने भलकू की विलक्षण प्रतिभा का विस्तार से वर्णन किया। प्रमुख यांत्रिक अभियंता कौस्तुभ मणि ने इस यात्रा को दुर्लभ बताया और रेलवे की तरफ से बहुत बहुत बधाई भी दी।

हरनोट ने कालका शिमला रेलवे सोसाइटी और सभी वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और सम्मानित अधिकारियों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही स्थानीय लोगों, युवाओं और मीडिया का भी। इस सत्र की यह खासियत रही कि कविता पाठ की शुरुआत ग्यारह वर्षीय बिटिया तेजस्विनी ने की और इस सत्र का समापन मशहूर लोक गायक जगदीश शर्मा ने किया। मंच का सफल संचालन कवि आत्मा रंजन ने किया। यात्रा में शामिल लेखकों में एस.आर.हरनोट, आत्मारंजन, गुप्तेश्वर नाथ उपाध्याय, विद्या निधि छाबड़ा, आनंद प्रकाश, दिनेश शर्मा, अभिषेक तिवारी, रोशन जसवाल, मधु शर्मा कात्यायनी, गुलपाल वर्मा, वीरेंद्र कुमार, धनंजय सुमन, स्नेह नेगी, सुमित राज,भारती कुठियाला, कल्पना गांगटा, वंदना राणा, शोभा बारहठ, लेखराज चौहान, मोनिका छट्टू, नरेश देयोग, कुलदीप तरुण, सीता राम शर्मा, उमा ठाकुर “नधैक”, कुल राजीव पंत, शांति स्वरूप शर्मा,आयुष ठाकुर, रत्न चंद निर्झर, तेजस्विनी मेहता, राज कुमार गौतम(प्रिंसिपल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चनावग, जगदीश गौतम(टीवी रेडियो एंकर व उप प्रधान, चनावग पंचायत, प्रेम लाल शर्मा (शास्त्री), वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चनावग, सुनील कुमार हरनोट, महा सचिव, ग्रामीण विकास सभा, चनावग, एनी गुप्ता, नीलांजना, यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया जो हिमाचल विश्विद्यालय से पीएचडी कर रही है,रितिका ठाकुर, दिव्यांश, मुख्य रूप से शमिल रहें।

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