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पहाड़ों से राष्ट्रीय मंच पर, हिमाचल के ग्रे-वाटर प्रबंधन के प्रयासों की गूंज

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हिमाचल प्रदेश के ग्रे-वाटर प्रबन्धन के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है और राज्य के मॉडल को देशभर में अपनाए जाने पर विचार किया जा रहा है, यह बात स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण हिमाचल प्रदेश के एक प्रवक्ता ने कही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय पेयजल एवम स्वच्छता विभाग द्वारा जल जीवन मिशन व स्वच्छ भारत मिशन के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ में स्वच्छता के क्षेत्र में किए गए उत्तम प्रयासों को उल्लेखित करने के लिए आयोजित होने जा रहे दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभाग व वाश इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधियों को अपने अनुभव सांझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

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उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत राज्य को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य के साथ ग्रामीण विकास विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा वृहद प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में विभाग द्वारा कॉन्वेर्जेन्स के माध्यम से पंचायती राज व राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को शामिल कर वाश इंस्टीट्यूट की तकनीकी सहायता से राज्यभर में ग्रे-वाटर प्रबन्धन पर एक व्यापक जागरूकता एवं सर्वेक्षण अभियान चलाया गया। प्रदेश के सभी गांवों को इस सर्वेक्षण में शामिल कर राज्य के ग्रे-वाटर प्रबन्धन, शौचालय प्रणाली व स्वच्छता की स्थिति को जानने का प्रयास किया गया। इस प्रयास को सकारात्मक रूप देने के लिए वाश इंस्टीट्यूट द्वारा तकनीकी सहयोग दिया गया जिसके तहत स्वच्छता से सम्बंधित जानकारी एकत्र करने के लिए एक ऐप्प डिज़ाइन की गई। इसके अलावा वाश इंस्टीट्यूट द्वारा इन CRPs को अन्य सर्वेक्षण सम्बंधी सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई जिससे उन्हें सर्वेक्षण के दौरान कोई समस्या न आये। वाश इंस्टिट्यूट द्वारा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की लगभग 1744 चयनित सामुदायिक स्रोत व्यक्ति (CRP) महिलाओं को ऐप्प का प्रशिक्षण दिया गया।

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इन CRPs द्वारा प्रदेश के 16743 गांवों का वास्तविक सर्वेक्षण किया जा रहा है जिसमें अब तक साढ़े 13 हजार से अधिक गांवों में यह सर्वेक्षण किया गया है। इस दौरान इन प्रशिक्षित CRPs द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों की सहायता से ग्राम बैठकों का आयोजन किया गया व लगभग साढ़े तीन लाख लोगों से संवाद कर उन्हें ग्रे-वाटर प्रबन्धन, शौचालय प्रणाली और स्वच्छता से सम्बंधित जानकारी देकर जागरूकता फैलाने का कार्य किया गया।

वाश इंस्टीट्यूट के सहयोग से ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किये गए इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है और हिमाचल के इस मॉडल को देशभर में अपनाए जाने की कवायद शुरू हो गई है।

इसी कड़ी में 16-17 फरवरी को लखनऊ में होने जा रहे राष्ट्र स्तरीय सम्मेलन में ग्रामीण विकास विभाग हिमाचल व वाश इंस्टीट्यूट हिमाचल के प्रतिनिधि अपने अनुभव सांझा करेंगे। इस सम्मेलन में सभी राज्यों के स्वच्छ भारत मिशन के प्रतिनिधि, विशेषज्ञ, पर्यावरणविद आदि भाग लेंगे।

Deepika Sharma

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